
आर्इबीसी में बदलाव के सरकारी फैसले से होम बायर्स को मिलेंगे करीब डेढ़ लाख करोड़
नर्इ दिल्ली। इन्सॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड में बदलाव के बाद रियल एस्टेट को सांप सूंघ गया है। इस आदेश के रियल एस्टेट के बड़े मगरमच्छों को देश के लाख बायर्स को कइर् लाख करोड़ रुपए का भुगतान करना करना होगा। केंद्र के इस फैसले के बाद होम बायर्स को बड़ी मिली है! साथ ही नोएड-एनसीआर ही नहीं बल्कि देश के सभी उन इलाकों में खुशी की लहर है जहां बायर्स का रुपया रियल एस्टेट बिल्डर्स के पास फंसा हुआ था। 10 से अधिक समय से वो अपने आशियाने का इंतजार कर रहे थे। साथ ही अपने डूबे हुए रुपए को वापस लाने के लिए कोर्ट में लड़ार्इ लड़ रहे थे।
देश में करीब 50 लाख होम बायर्स
देश में अपने आशियाने का इंतजार कर रहे होम बायर्स की संख्या की बात करें तो करीब 50 लाख है। जानकारी के अनुसार गौतमबुद्घनगर में एेसे बायर्स की संख्या करीब 5 लाख है। जबकि गाजियाबाद में 2 लाख है। मेरठ में 50 हजार, गुड़गांव में 1 लाख आैर फरीदाबाद में एेसे बायर्स की संख्या 2 लाख के करीब है। अगर पूरी वेस्ट यूपी की बात करें तो एेसे बायर्स की संख्या 10 से 15 लाख के करीब पहुंच रही है। जानकारों की मानें तो देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए बायर्स की संख्या 50 लाख के आसपास पहुंच रही है। जिसके बाद ही कोर्ट को भी इस मामले में सामने आना पड़ा। कोर्ट की ही दखलअंदाजी के बाद ही केंद्र को इस आेर आगे बढ़ना पड़ा है।
इन शहरों में फंसे हुए हैं इतने बायर्स
| शहर | बायर्स की संख्या |
| गौतमबुद्घनगर | 5 लाख |
| गाजियाबाद | 2 लाख |
| गुड़गांव | 1 लाख |
| फरीदाबाद | 2 लाख |
| वेस्ट यूपी | 15 से 20 लाख |
| देश | करीब 50 लाख |
करीब डेढ़ लाख करोड़ दांव पर
नेफोवा के अध्यक्ष आैर बायर्स समस्याआें को लेकर लड़ार्इ लड़ने वाले अन्नू खान की मानें तो केंद्र के इस फैसले के बाद देश के फ्लैट बायर्स के करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपयों को वापास लाने का रास्ता मिल गया है। देश के करीब 50 लाख बायर्स के आैसतन 30 लाख रुपए बिल्डर्स के पास फंसे हुए हैं। एेसे में यह आंकड़ा डेढ़ लाख करोड़ रुपए के आसपास पहुंच रहा है। इतनी बड़ी रकम किसी राज्य की कुल जीडीपी के बराबर होगी। बायर्स का बिल्डर्स ने मारा हुआ है। सरकार इस तरह के कदम पहले से ही उठाने चाहिए।
रेरा को अच्छे से करना होगा लागू
रियल एस्टेट के जानकार कमल ठाकुर की मानें तो रेरा को पूरे देश में लागू करना बहुत जरूरी हो गया है! कमल ठाकुर का कहना है कि अगर इन दिक्कतों को खत्म करना है तो रेरा को जल्द से जल्द सिंप्लीफार्इ कर लागू करना होगा। ताकि देश के सभी लोगों को रेरा अच्छे से समझ में आ सके। केंद्र ने जो एक दिन पहले जो फैसला दिया है वो बायर्स को काफी राहत देगा।
कहीं 2019 का तो पैंतरा नहीं?
वहीं कुछ जानकार इसे 2019 के चुनावों का पैंतरा भी बता रहे हैं। नोएडा एनसीआर में पिछले कर्इ सालों से इस समस्या से जूझ रहे हैं! ताज्जुब की बात तो यह है 2014 के बाद से जिले में सांसद आैर कुछ विधायक भी सत्ताधारी दल के हैं। बावजूद इसके सरकार इस मामले में थोड़ा ढीला रवैया अपनाए हुए थी। वहीं दूसरी आेर राजनाथ सिंह के बेटे आैर नोएडा के विधायक पिछले कुछ समय से बायर्स की इस समस्या को केंद्र तक पहुंचाने आैर लोगों के मिजाज को आलाकमान देने का काम कर रहे थे। इस मामले में लोगों का रोेष देशभर में देखने को मिल रहा था। केंद्र सरकार पर बायर्स को राहत देने का काफी दबाव भी था!
Published on:
24 May 2018 02:00 pm
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