
धरातल की आेर अर्थव्यवस्था, फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा पाकिस्तान
नर्इ दिल्ली। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार बुरे दौर से गुजर रही है। अब पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने भुगतान संकट और कम विदेशी मुद्रा भंडार के चलते दिसम्बर से तीसरी बार अपनी मुद्रा का अवमूल्यन कर दिया है। कुछ विश्लेषकों का यह भी अनुमान है कि पाकिस्तान की जीडीपी वृद्धि छह साल में पहली बार 2018 में सबसे धीमी हो सकती है। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार तीन साल में पहली बार सबसे कम हो गया है, जबकि चालू खाता घाटा बढ़ गया है।
पाकिस्तानी केन्द्रीय बैंक ने अपने लक्ष्य नीति दर काे बढ़ाया
यही नहीं सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में बाहरी ऋण और देनदारियां पहली तिमाही में लगभग छह वर्षों में सबसे ऊपर है। पिछले महीने पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने अपनी लक्ष्य नीति दर 6.5% तक बढ़ा दी जो तीन वर्षों में सबसे अधिक है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में इमरान खान लगातार इस सवाल को उठाते रहे हैं।
विदेशी रिजर्व में आर्इ भारी गिरावट
हाल ही में पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने कहा था निर्यात में वृद्धि और आयात में कुछ गिरावट के बावजूद अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण और गिरावट आई है। सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल-एन) रुपये को अपेक्षाकृत स्थिर रखने के लिए अपनी नीति के लिए जानी जाती है लेकिन चालू खाता घाटा बढ़ने पर विदेशी रिजर्व अपने चरम पर आधे हिस्से तक गिर गया। सोमवार को पाकिस्तानी रुपया 115.63 पर पहुंचने के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 119.85 पर बंद हुआ। पाकिस्तानी रूपये में दिसंबर में और मार्च में केंद्रीय बैंक द्वारा 5% की गिरावट आई है।
जब किसी देश द्वारा मुद्रा की विनिमय दर अन्य देशों की मुद्राओं की तुलना में जानबूझ कर कम कर दिया जाये ताकि निवेश को बढ़ावा मिल सके तो उसे अवमूल्यन कहते हैं। आधुनिक मौद्रिक नीति, एक अवमूल्यन एक नियत विनिमय दर प्रणाली के भीतर देश के मुद्रा के मूल्य का आधिकारिक कम है।
Published on:
12 Jun 2018 05:18 pm
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