Bank of England के गवर्नर बन सकते हैं रघुराम राजन, रेस में इकलौते विदेशी

  • बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर की रेस में रघुराम राजन।
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के चीफ इकोनॉमिस्ट रह चुके हैं राजन।
  • भारत में नोटबंदी के पक्ष में नहीं थे राजन।

By: Ashutosh Verma

Published: 12 Jun 2019, 03:06 PM IST

नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ( IMF ) के साथ काम कर चुके और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रह चुके रघुराम राजन अब इंग्लैंड के केंद्रीय बैंक के गवर्नर बन सकते हैं। bank of england के अगले गवर्नर की रेस में रघुराम राजन ( Raghuram Rajan ) इकलौते विदेशी हैं। 325 साल पुराने इस बैंक का मौजूदा गवर्नर मार्क कार्ने हैं। हाल ही, ब्रेग्जिट की अनिश्चित्तता को लेकर कार्ने के लिए अपना कार्यकाल आसान नहीं रहा।

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यूके ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने क्या कहा

बैंक ऑफ इंग्लैंड के अगले गवर्नर की रेस में एंड्रयू बेली भी हैं जो पहले भी यहां काम कर चुके हैं। भारतीय रिजर्व बैं के गवर्नर पद से इस्तीफा देने के बाद राजन अब शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर है। उनकी तरफ से खबर को लेकर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं मिली है। यूनाइटेड किंग्ड ट्रेजरी ने भी इस पर अभी तक कोई बयान नहीं है। यूके ट्रेजरी ही बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर की नियुक्ति करेगी।

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राजन का बेहतर ट्रैक रिकार्ड

इस रेस में अन्य उम्मीदवारों की तुलना में रघुराम राजन का ट्रैक रिकॉर्ड बेहतर रहा है साल 2003-2006 के बीच रघुराम राजन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के चीफ इकोनाॉमिस्ट रह चुके हैं। साल 2013 में भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर बनने से पहले वो भारत सरकार के सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं। साल 2016 के दौरान अपने आईएमएफ के कार्यकाल में राजन ने कहा था कि वैश्विक वित्तीय संकट मंडरा रहा है। रघुराम राजन की इस बात पर अमरीकी अर्थशास्त्री लैरी समर्स ने उनकी निंदा की थी। लेकिन, रघुराम राजन के इस बयान के ठीक तीन साल बाद लेहमन ब्रदर्स धराशायी हुआ था।

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नोटबंदी के पक्ष में नहीं थे राजन

आरबीआई में अपने कार्यकाल के दौरान राजन ने मुद्रास्फिति को लेकर कई काम किया। साथ ही देश के बैंकिंग इंडस्ट्री में फंसे कर्ज को भी खत्म करने की दिशा में काम किया। हालांकि, इस दौरान उनकी काफी आलोचान भी हुई थी। साल 2017 में अपनी एक किताब में राजन ने लिखा है कि उन्होंने सरकार को नोटबंदी से पहले चेताया था। उन्होंने कहा था छोटी अवधि में होने वाले नुकसान लंबी अवधि में होने वाले फायदे से कहीं अधिक होंगे।

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