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खाद्य पदार्थाें की कीमतों की वजह से 6 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची खुदरा महंगाई

जनवरी में खुदरा महंगाई बढ़कर 7.59 प्रतिशत पर पहुंची दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 7.35 फीसदी पर पहुंची थी

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नई दिल्ली। दिल्ली के विधानसभा चुनाव की हार के बाद अब केंद्र की सरकार को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। देश में खुदरा महंगाई दर के आंकड़े सामने आ गए हैं। जो छह साल उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। बीते महीने के हिसाब से खुदरा महंगाई दर में इजाफा 0.44 फीसदी का देखने को मिला है। आपको बता दें कि आरबीआई की ओर से 6 फरवरी को हुई मौद्रिक समीक्षा की बैठक में महंगाई बढऩे के संकेत दे दिए थे। वहीं दिसंबर का औद्योगिक उत्पादन 0.30 फीसदी कम हुआ है, जबकि एक साल पहले समान अवधि में 2.5 फीसदी का इजाफा देखने को मिला था।

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6 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची खुदरा महंगाई
सरकार की ओर जारी खुदरा महंगाई दर छह साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। आंकड़ों के जनवरी के महीने में खुदरा महंगाई दर 7.59 प्रतिशत पर पहुंच गई है। जबकि दिसंबर के महीने में खुदरा महंगाई दर 7.35 फीसदी थी। आरबीआई की ओर से भी खुदरा महंगाई दर के इजाफे का अनुमान लगाया था। वहीं बीते कुछ दिनों में आर्थशास्त्रियों के साथ किए गए सर्वे में 7.40 फीसदी खुदरा महंगाई दर का अनुमान लगाया गया था। आपको बता दें कि आरबीआई की ओर से मौद्रिक समीक्षा की बैठक में रेपो और रिजर्व रेपो दरों में लगातार दूसरी बार स्थिरता रखी थी।

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खाद्य पदार्थों की खुदरा महंगाई दर
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, जनवरी में खाद्य पदार्थों की खुदरा महंगाई दर 13.63 फीसदी रही। सब्जियों, दालों, मांस-मछली और अंडों के दाम में सबसे तेज बढ़ोतरी हुई। पिछले साल जनवरी की तुलना में सब्जियों के दाम 50.19 फीसदी और दालों तथा इनके उत्पादों के दाम 16.71 फीसदी बढ़े। मांस-मछली के दाम 10.50 फीसदी और अंडे के 10.41 फीसदी बढ़े। लगातार तीसरे महीने खाद्य खुदरा महंगाई दर दहाई अंक में रही है। नवंबर 2019 में यह 10.01 फीसदी और दिसंबर 2019 में 14.19 फीसदी रही थी।

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कच्चा तेल हुआ सस्ता
जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में महंगाई दर में गिरावट भी देखने को मिल सकती है। उसका कारण है कच्चे तेल की कीमतों में 20 फीसदी की गिरावट आना। जिसका असर भारत में भी देखने को मिलेगा। बीते महीने सब्जियों की कीमतों में इजाफा होने के कारण खुदरा महंगाई दर में इजाफा देखने को मिला है। खासकर प्याज की कीमतें 150 रुपए से लेकर 200 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई थी। इस महीने सब्जियों की कीमतों में भी हल्की नरमी देखने को मिल रही है। वहीं रबी की फसल के अच्छे होने के अनुमान से यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों में महंगाई दर में कटौती देखने को मिल सकती है।

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आईआईपी में 0.3 फीसदी की गिरावट
खपत घटने और कारखानों की बंदी के बीच दिसंबर 2019 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 0.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी है जबकि दिसंबर 2018 में इमसें 2.5 फीसदी की वृद्धि हुई थी। सरकार ने बुधवार को जारी आंकड़ों में बताया कि चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर 2019 की अवधि में आईआईपी में 0.5 फीसदी की वृद्धि हुई है। अप्रैल से दिसंबर 2018 की अवधि में आईआईपी वृद्धि दर 4.7 फीसदी रही थी। दिसंबर 2019 में खनन के उत्पादन में 5.4 फीसदी की तेजी आयी है। वहीं विनिर्माण में 1.2 फीसदी और बिजली में 0.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी है। अप्रैल से दिसंबर 2019 की अवधि में खनन के उत्पादन में 0.6 फीसदी, विनिर्माण में 0.5 फीसदी और बिजली में 0.8 फीसदी की वृद्धि हुई है।

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