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फर्जी जीएसटी बिल से 110 करोड़ रुपए का इनपुट क्रेडिट टैक्स घोटाला, एक हिरासत में, दूसरा फरार

जीएसटी के फर्जी बिल लगाकर 110 करोड़ रुपए के क्रेडिट टैक्स घोटाला सामने आया है। दो आरोपियों में से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं दूसरा आरोपी फरार चल रहा है।

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Saurabh Sharma

Feb 25, 2019

GST

फर्जी जीएसटी बिल से 110 करोड़ रुपए का इनपुट क्रेडिट टैक्स घोटाला, एक हिरासत में, दूसरा फरार

नई दिल्ली। जीएसटी के फर्जी बिल लगाकर 110 करोड़ रुपए के क्रेडिट टैक्स घोटाला सामने आया है। दो आरोपियों में से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं दूसरा आरोपी फरार चल रहा है। जीएसटी में इस तरह के फ्रॉड का पर्दाफाश सेंट्रल जीएसटी और सेंट्रल एक्साइज कमिश्नरेट की रायगढ़ विंग ने किया है। जानकारी के अनुसार 650 करोड़ रुपए के गुड्स सप्लाई करने और करीब 110 करोड़ रुपए के जीएसटी पेमेंट के फर्जी बिल कथित तौर पर आरोपी कंपनियों के फेवर में बनाए गए थे। इन फर्जी खरीदारियों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने के इरादे से यह काम किया गया था।

एक आरोपी अरेस्ट और दूसरा फरार
मामले में टीम ने एक आरोपी आनंद मंगल को गिरफ्तार किया है, जिसे पनवेल की एक कोर्ट ने 8 मार्च तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा है। वहीं दूसरा आरोपी राकेश एच गर्ग फरार बताया जा रिा है। राकेश एच गर्ग बेसिक ऑयरन और स्टील बनाने वाली कंपनी सूर्या फेरस अलॉयज प्राइवेट लिमिटेड का डायरेक्टर है। टैक्स अधिकारियों की मानें तो मामले में 17 करोड़ रुपए कैश रिकवर हुए हैं।

इन कंपनियों के नाम पर जारी हुए थे फर्जी बिल
सीजीएसटी, रायगढ़ के कमिश्नर श्रवण कुमार ने पूरे मामले की पुष्टी करते हुए बताया कि दोनों आरोपियों पर सीजीएसटी एक्ट के सेक्शन 132 के तहत मामला दर्ज किया गया है। सूत्रों के अनुसार मेसर्स मोक्ष अलॉयज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स लतिशा सेल्स एजेंसीज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स क्युमोंग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स आहन इस्पात प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स तिलीबंध सेल्स एजेंसीज जैसे नामों से कई यूनिट्स खोलकर कथित फर्जी बिल जारी किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार यह तमाम कंपनियों है ही नहीं। इन कंपनियों ने असल में कोई माल सप्लाई नहीं किया, लेकिन बिल में 650 करोड़ रुपए का माल भेजा दिखाया गया। अधिकारियों के अनुसार इन कंपनियों के जरिए गर्ग ने करीब 110 करोड़ रुपए हासिल किए। सूत्रों की मानें तो सभी फर्जी सेल्स बिल, ईवे बिल, लॉरी रिसीट और दूसरे ट्रांसपोर्ट डॉक्युमेंट्स गर्ग के ऑफिस में बनाए गए थे। कुछ मामलों में जिन गाडिय़ों से माल ट्रांसपोर्ट की बात दिखाई गई, वे टू-व्हीलर्स और कारों के रूप में रजिस्टर्ड हैं।