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दिवालिया होने के कगार पर पहुंची देश की बड़ी कंपनी, बैंकों का है 13 हजार करोड़ रुपए का बकाया

वीडियोकॉन ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ कई बैंकों की ओर से रिट दाखिल की है, जिसकी सुनवाई मुंबई की दिवालिय कोर्ट में होने की संभावना है।

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Saurabh Sharma

May 07, 2018

SBI

नई दिल्ली। आईसीआईसीआई बैंक का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मामले में सबसे बड़ा अपडेट हुआ है वो काफी हैरान करने वाला है। क्‍योंकि इस मामले से जड़ी कंपनी वीडियोकॉन दिवालिया घोषित हो सकती है। इसके लिए बैंकों की ओर कदम भी उठा लिया गया है। जानकारों की मानें तो वीडियोकॉन पर करीब 13 हजार करोड़ रुपए का बकाया है। इतनी बड़ी रकम की रिकवरी के लिए बैंकों की ओर से यह बड़ी कार्रवाई की गई है। प्राप्‍त जानकारी के अनुसार बैंकों ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में केस फाइल करने के लिए चार क्लस्टर्स बनाए हैं। इन क्लस्टर्स को ऑपरेशनल केस के लिए बनाया गया है।

मुंबई की अदालत में होगी सुनवाई
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार वीडियोकॉन ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ कई बैंकों की ओर से रिट दाखिल की है। जिसकी सुनवाई मुंबई की दिवालिय कोर्ट में होने की संभावना है। वैसे बैंकों की याचिका को मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन पूरी तरह से आश्‍वस्‍त हैं कि उनकी बातों को कोर्ट जरूर सुनेगा। बैंकों द्वारा इस मामले में चार अंतरिम रेज्यूलेशन प्रपेशनल्स की भी नियुक्ति की है, जिसमें सिंघी एडवाइजर्स के दिव्येश देसाई, पीडब्ल्यूसी इंडिया के महेंद्र खंडेलवाल और कॉस्ट अकाउंटेंट दुष्यंत दवे को शामिल हैं। ये तीनों वीडियोकॉन के एक क्लस्टर की जिम्मेदारी को संभालेंगे. हर क्लस्टर में ग्रुप की तीन सब्सिडियरी कंपनियों को शामिल किया गया है। वहीं एक क्लस्टर में चार कंपनियां शामिल हैं।

इन कंपनियों के खिलाफ हुई रिट
वीडियोकॉन ग्रुप की कई कंपनियों के खिलाफ याचिका दाखिल की गई है। इन कंपनियों में सेंचुरी एप्लायंसेज, वैल्यू इंडस्ट्रीज, ट्रेंड इलेक्ट्रॉनिक्स, स्काई एप्लायंसेज और पीई इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं। वीडियोकॉन ग्रुप की विदेशी यूनिट्स के पास ऑयल एंड गैस ब्लॉक्स में हिस्सेदारी है। बैंक इस पर अपना दावा करने की कोशिश कर सकते हैं। वीडियोकॉन ग्रुप के संस्थापक वेणुगोपाल धूत ने एसबीआई पर आरोप लगाया था कि एसबीआई ने छोटे बदलाव का बहाना कर मूल याचिका में कई बदलाव किए हैं। धूत ने इस आधार पर एसबीआई की ऑरिजिनल एप्लिकेशन को गलत बताते हुए मामला खारिज करने की दलील दी थी।

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