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वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में भारत बना बैंक खातों के मामले में नंबर वन

विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में हुए कहा है कि वर्ष 2014 में देश के 53 फीसदी व्यस्कों के पास बैंक खाता था, जो वर्ष 2017 में बढ़कर 80 फीसदी पर पहुंच गया।

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World Bank

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नई दिल्ली। भले ही डोकलाम को लेकर भारत और चीन में तनातनी चल रही हो, सैन्‍य मामलों और टेक्‍नोलॉजी के मामले में चीन भारत से थोड़ा आगे हो। लेकिन एक चीज में भारत और चीन में बराबरी में आ गए हैं। यह खुलासा वर्ल्‍ड बैंक की रिपोर्ट में हुआ है। ताज्‍जुब की बात तो ये है कि भारत ने यह उपलब्धि मात्र दो सालों में हासिल कर ली है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर वर्ल्‍ड बैंक की रिपोर्ट में आखिर किस चीज में भारत और चीन ने बराबरी कर ली है।

चीन और भारत बराबरी पर पहुंचा
विश्व बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में प्रधानमंत्री जनधन योजना के जरिए वित्तीय समावेशन में आई तेजी का हवाला देते हुए कहा है कि वर्ष 2014 में देश के 53 फीसदी व्यस्कों के पास बैंक खाता था, जो वर्ष 2017 में बढ़कर 80 फीसदी पर पहुंच गया। विश्व बैंक ने ग्लोबल फिनडेक्स रिपोर्ट में वैश्विक वित्तीय समावेशन में वृद्धि में भारत की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा है कि वर्ष 2011 में देश के मात्र 35 फीसदी व्यस्कों के पास बैंक खाता था जो वर्ष 2017 में बढ़कर 80 प्रतिशत पर पहुंच गया। इसमें कहा गया है कि चीन में भी 80 फीसदी व्यस्कों के पास बैंक खाता है।

दो सालों में खुल गए 31 करोड़ से अधिक खाते
रिपोर्ट में जनधन योजना का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस योजना में बॉयोमीट्रिक पहचान के उपयोग से वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद मिली है। बैंकों से लिए गये सरकारी आँकड़ों के अनुसार, मार्च 2017 में 28.17 करोड़ जन धन खाते थे, जो मार्च 2018 में बढ़कर 31.44 करोड़ पर पहुंच गया। इसी तरह से मार्च 2015 में कुल चालू और बचत खातों की संख्या 122.3 करोड़ थी जो मार्च 2017 में बढ़कर 157.1 करोड़ पर पहुंच गई।

विश्‍व में नंबर वन
विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर वर्ष 2014 से 2017 के दौरान कुल 51.4 करोड़ खाते खोले गए। इसी अवधि में भारत में जनधन योजना के तहत 28.17 करोड़ खाते खोले गए जो वैश्विक स्तर पर खुले कुल खातों का करीब 55 फीसदी है। इसमें कहा गया है कि जन धन योजना के तहत खाते खोलने में आई तेजी से भारत में इस मामले में लिंगानुपात में भी सुधार हुआ है। इसके साथ ही मुद्रा योजना में भी खुल रहे खातों में से 75 फीसदी महिलाओं के खाते हैं।