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कागज पर दिख रहे लेकिन सच में गायब हो गए करदाता

आयकर विभाग के लिए गुमशुदा करदाता बने सिरदर्दरीओपन केस में नहीं मिल रहे 25 प्रतिशत करदाता

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सूरत

आयकर विभाग के लिए गुमशुदा करदाता सिरदर्द बन गए हैं। आयकर विभाग की ओर से एसेसमेन्ट वर्ष 2011-12 के मामलों को रीओपन किया गया है। इनकी जांच के लिए विभाग ने लगभग तीन हजार करदाताओं को नोटिस दिया है। इनमें से 25 प्रतिशत करदाता मिल ही नहीं रहे हैं। आयकर विभाग अलग-अलग माध्यमों से इन्हें ढूंढ रहा है, लेकिन इन्हें ढूंढ पाना टेढी खीर साबित हो रहा है। विभाग ने म्युनिसीपल कोर्पोरेशन सहित कई सरकारी एजंसियों को पत्र लिखकर भी जानकारी मांगी है। इन दिनो भी विभाग ने कई करदाताओं की जानकारी मांगी है, जिनमें कि कुछ लोगों की जानकारी मिलने की उम्मीद है।ओ
आयकर विभाग ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में लगभग 3000 केस रीओपन किए हैं। इसमें ज्यादातर केस जमीन मकान ख्ररीद, शेयर बाजार में निवेश तथा बड़ी रकम निवेश करने के बाद आयकर रिटर्न नहीं फाइल करने वालों के हैं। यह मामले वित्तीय वर्ष 2010-11 के होने के कारण कई करदाता विभाग को नहीं मिल रहे। कई करदाताओं ने निवास बदल दिया है, कुछ ने शहर बदल दिया तो कुछ जीवित नहीं हंै। आयकर विभाग की ओर से नोटिस भेजे जा रहे हैं, लेकिन करदाता नहीं मिलने से वापस आ रहे हैं। ऐसे में आयकर अधिकारी परेशान हो गए हैं। एक ओर सीबीडीटी की ओर से रिकवरी बढ़ाने का निर्देश हैं, वहीं, कई करदाता गायब होने से रिकवरी पर भी असर पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि आयकर विभाग ने पिछले दिनों 100 से अधिक करदाताओं को ढूंढ निकाला था, विभाग अभी भी कई करदाताओं को तलाश रहा है। करदाताओं कढूंढ निकालने के लिए विभाग इन दिनो सोशल मीडिया का सहारा भी ले रहा है। इसके अलावा विभाग ने म्युनिसीपल कोर्पोरेशन सहित कई सरकारी एजंसियों को पत्र लिखकर भी जानकारी मांगी है। इन दिनो भी विभाग ने कई करदाताओं की जानकारी मांगी है, जिनमें कि कुछ लोगों की जानकारी मिलने की उम्मीद है।