मॉर्गन स्टेनली के कहा- अगले 9 महीनों में आ सकती है वैश्विक मंदी, अमरीका व चीन होंगे वजह

मॉर्गन स्टेनली के कहा- अगले 9 महीनों में आ सकती है वैश्विक मंदी, अमरीका व चीन होंगे वजह

Ashutosh Kumar Verma | Publish: Aug, 13 2019 08:43:50 AM (IST) | Updated: Aug, 13 2019 10:04:52 AM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

  • अमरीका व चीन के बीच व्यापारिक तनाव की वजह से दुनियाभर में मंदी का खतरा।
  • बांड यील्ड का ग्राफ भी दे रहा संकेत।
  • भारत की अर्थव्यवस्था में पिछली तीन तिमाहियों में गिरावट ही रही है और विकास का पूर्वानुमान भी नहीं बढ़ा।

नई दिल्ली। दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं मंदी का संकेत दे रही हैं और इसका अगला चरण वैश्विक मंदी होगा। अगर मॉर्गन स्टेनली की मानें तो यह मंदी अभी से अगले 9 महीनों में ही आ जाएगी। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं- अमरीका और चीन के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव दुनिया को मंदी की ओर ढकेलने वाला मुख्य कारक है।

बीते कुछ समय में बांड यील्ड को देखते हुए भी इसे एक विश्वसनीय संकेतक माना जा रहा है। मंदी से पहले भी बांड यील्ड के ग्राफ का कर्व उलटा हुआ था और यह अब लगभग वैसा ही हो रहा है जैसा कि 2008 के वित्तीय संकटों से पहले देखने को मिला था।

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Morgan Stanley

अमरीका के कदम पर होगी दुनिया की नजर

मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि अगर अमरीका के जरिए व्यापार युद्ध फिर से भड़कता है और वह चीन से आयातित सभी सामानों पर शुल्क बढ़ाकर 25 फीसदी कर देता है, तो "दुनिया में तीन तिमाहियों में ही मंदी आ जाएगी।" भारत में हालांकि मंदी के उतने लक्षण नहीं दिख रहे हैं, लेकिन वाहन उद्योग जैसे कुछ क्षेत्र खतरनाक रूप से मंदी के करीब हैं।

भारत को लेकर क्या हैं आसार ?

भारत की अर्थव्यवस्था में पिछली तीन तिमाहियों में गिरावट ही रही है और विकास का पूर्वानुमान भी नहीं बढ़ रहा है। औद्योगिक उत्पादन और कोर इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों क्षेत्रों में गिरावट देखी गई है। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था और अन्य यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं पर मंदी का एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ब्रेक्जिट के कारण राजनीतिक अनिश्चितता की वजह से वहां दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद सिकुड़ गया है, जिससे आसन्न मंदी की आशंका बढ़ गई है।

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America China

कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने उठाया सावधानी भरा कदम

वैश्विक मंदी के बीच, वैश्विक केंद्रीय बैंक कार्रवाई में जुट गए हैं। भारत ने बेंचमार्क नीतिगत दरों में 35 आधार अंकों की कटौती की, न्यूजीलैंड ने 50 आधार अंकों और थाईलैंड ने भी आश्चर्यजनक रूप से 25 आधार अंकों की कटौती की है। हालांकि, भारत में मंदी का खतरा आसन्न नहीं है, लेकिन सरकार और नीति निर्माता इसकी अनदेखी नहीं कर सकते और उन्हें जरूरी कदम उठाने होंगे।

 

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