
दक्षिण अफ्रीका में शी आैर मोदी करेंगे ट्रेड वाॅर पर बात, अमरीका की बढ़ेंगी चिंताएं
नर्इ दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जोहांसबर्ग में अगले हफ्ते ब्रिक्स सम्मेलन से इतर होने वाली मुलाकात में अमरीका के व्यापार युद्ध और उसकी संरक्षणवादी व्यापार नीति पर चर्चा करेंगे। चीनी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
जारी है चीन आैर अमरीका में ट्रेड वाॅर
चीन और अमरीका के बीच व्यापार युद्ध जारी है और इस बीच नई दिल्ली ने पिछले माह अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारतीय इस्पात और एल्युमिनियम पर ज्यादा कर बढ़ाने के निर्णय के प्रतिक्रिया स्वरूप 30 अमेरिकी उत्पादों पर कर बढ़ाने का निर्णय लिया था।
शी आैर मोदी करेंगे मुलाकात
चीनी मंत्रालय ने कहा कि शी और मोदी 25 जुलाई से शुरू होने वाले ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका(ब्रिक्स) की तीन दिवसीय बैठक से इतर जोहांसबर्ग में आपसी मुलाकात करेंगे।
होगी द्विपक्षीय वार्ता
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हू चुनयिंग ने कहा, "राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दक्षिण अफ्रीका जाएंगे। सम्मेलन के इतर, शी भारत और अन्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। बैठक से संबंधित विवरण पर बातचीत हो रही है।"
इन पर होगी चर्चा
क्या अमरीका के व्यापार युद्ध के बारे में दोनों नेताओं के बीच चर्चा होगी? हुआ ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम, ब्रिक्स सहयोग और साझा हित के अन्य मुद्दों पर बातचीत होगी। जहां तक अमेरिकी व्यापार संरक्षणवाद और एकलवाद की बात है, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में इस मुद्दे को लेकर व्यापक चिंता बढ़ी है।"
इन मुद्दों चीन आैर भारत एक जैसे
हुआ ने कहा, "चीन और भारत बहुपक्षीय, मुक्त व्यापार और दुनिया की ओर खुली अर्थव्यवस्था की नीति अपनाते हैं। इस परिपेक्ष्य में दोनों आम सहमति रखते हैं। मुझे लगता है कि इन मुद्दों के साथ दोनों नेता साझा हित के अन्य मुद्दे पर विचार साझा करेंगे। इसपर ब्रिक्स देशों के बीच भी आम सहमति है।"
अमरीका की बढ़ेंगी चिंताएं
शी आैर पीएम मोदी की इस द्विपक्षीय चर्चा पर अमरीका के डाेनाल्ड ट्रंप की भी चर्चा रहेगी। क्योंकि जिस तरह से अमरीका ने ट्रेड वाॅर छेड़ा हुआ है। उससे यूरोपीय संघ के साथ दुनिया के कर्इ देश अमरीका से नाराज चल रहे हैं। एेसे में एशिया की दो महाशक्तियां ट्रेड वाॅर को लेकर एक साथ होती हैं तो अमरीका के लिए एक खतरे की घंटी है।
Updated on:
21 Jul 2018 09:33 am
Published on:
20 Jul 2018 08:09 pm
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