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ड्रॉपआउट 228 में से 100 बच्चे लौटे स्कूल

शिक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि ऐसे 30 मामले सामने आए हैं, जिसमें माता-पिता ने ही खेतों में हाथ बंटाने के लिए बच्चों को पढ़ाई छोडऩे पर मजबूर किया।

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- घरेलू मुद्दे और गंभीर गरीबी मुख्य कारण

-चामराजनगर जिले की स्थिति चिंताजनक

बेंगलूरु. बच्चों के स्कूल छोडऩे (ड्रॉपआउट) के मामले में चामराजनगर जिले की स्थिति अन्य जिलों के मुकाबले बेहद चिंताजनक है। शिक्षा विभाग के हाल ही के सर्वेक्षण के अनुसार जिले में ऐसे बच्चों की संख्या 128 है। हनूर तालुक में सबसे अधिक 48 बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं। इसके बाद चामराजनगर में 30, कोल्लेगल में 25, गुंडलुपेट में 19 और यलंदूर में 10 बच्चों ने स्कूल छोड़ा है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह संख्या school dropout 228 थी, लेकिन शिक्षा विभाग के प्रयासों के कारण लगभग 100 बच्चे अपने-अपने स्कूलों में वापस लौट आए।शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने ड्रॉपआउट का कारण जानने के लिए काउंसलिंग भी की है। घरेलू मुद्दे और गंभीर गरीबी उच्च ड्रॉपआउट दर के पीछे मुख्य कारक हैं।

शिक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि ऐसे 30 मामले सामने आए हैं, जिसमें माता-पिता ने ही खेतों में हाथ बंटाने के लिए बच्चों को पढ़ाई छोडऩे पर मजबूर किया। इसके अलावा, एम.एम. हिल्स के पहाड़ी इलाकों में पडऩे वाले स्कूलों में अनुपस्थिति में वृद्धि और त्योहारों के दौरान फूलों और अगरबत्ती जैसी पूजा सामग्री बेचने के लिए बच्चों को मजबूर किया जाना अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। शिक्षा विभाग स्कूल छोडऩे वाले छात्रों को वापस स्कूल लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। बच्चों से खेतों में काम कराने वाले परिवारों पर भी नजर है।

पूरे मामले पर नजदीक से नजर रख रहे शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी के अनुसार स्कूल छोडऩे वाले अधिकांश बच्चे पांच तालुकों में पडऩे वाले ग्रामीण और दूरदराज के गांवों से हैं। हालांकि, जिले में हाल के दिनों में कुछ बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों में सरकारी स्कूलों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन स्कूल छोडऩे वालों की दर अभी भी नियंत्रित नहीं हुई है।