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गीतांजलि मेडिकल कॉलेज उदयपुर में 48 सीटों पर पेमेंट सीटों से प्रवेश देने के मामले की जांच जारी है। काउंसलिंग बोर्ड ने कॉलेज से जानकारी मांगी है कि उसने किस परिस्थिति में इन सीटों को पेमेंट सीटों में बदला। कॉलेज से सीट छोडऩे वाले अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज मांगे गए हैं। एक-दो दिन में बोर्ड की मीटिंग होगी, जिसमें गीतांजलि के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। कॉलेज के जवाब पर इसमें चर्चा होगी। इसके बाद ही अंतिम रिपोर्ट एमसीआइ को भेजी जाएगी। काउंसलिंग बोर्ड के चेयरमैन डॉ. यूएस अग्रवाल ने कहा कि कॉलेज जो भी जवाब देगा, उसे एमसीआइ को भेज दिया जाएगा।
तो होती है मोटी कमाई
दरअसल, पेमेंट सीट और काउंसलिंग में मिली सीट में भारी अंतर होता है। पेमेंट सीट से सीट भरने पर कॉलेज एकसाथ करोड़ों की कमाई कर सकता है। ऐसे में आशंका यह भी जताई जा रही है कि मिलीभगत से सीटें आवंटित कराई जाती हैं, फिर उसे खाली कराकर पेमेंट सीट में बदल लिया जाता है। गौरतलब है कि कॉलेज में एकसाथ 48 सीटें खाली होने का मामला सामने आया है।
एक छात्रा का २ मेडिकल कॉलेज में प्रवेश, खुद को दी क्लीन चिट
काउंसलिंग बोर्ड ने आइएएस की बेटी के एकसाथ २ मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के मामले को सिरे से खारिज कर दिया है। कॉलेज प्रशासन ने खुद को क्लीनचिट देते हुए कहा है कि छात्रा को एसएमएस मेडिकल कॉलेज में हुई काउंसलिंग में भरतपुर मेडिकल कॉलेज आवंटित किया गया था। उसके एक घंटे बाद ही छात्रा रिजाइन कर चली गई तो उसका यहां प्रवेश हुआ ही नहीं। बोर्ड चेयरमैन डॉ यूएस अग्रवाल ने कहा कि तकनीकी कारण से सीट भरी दिखाने के बाद उसे कोर्ट के आदेश के बाद दूसरे अभ्यर्थी को आवंटित भी कर दिया गया था।
हमने ३ काउंसलिंग की थी। उनमें से कुछ आए नहीं, कुछ बीच में चले गए। ऐसे में 48 सीटें खाली हो गईं। हमने जवाब भेज दिया है। पूरी प्रक्रिया नियमानुसार की गई है। - भूपेन्द्र मंडालिया, रजिस्ट्रार, गीतांजलि मेडिकल कॉलेज
Published on:
10 Sept 2018 01:03 pm
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