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Education News जिन वीर जवानों ने देश के लिए जान न्यौछावर करने में क्षणभर भी नहीं लगाया, उनके नाम पर स्कूलों का नामकरण करने के लिए सरकार 8-10 साल से सोच ही रही है। शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी का दावा है कि 200 सरकारी स्कूलों का नाम शहीदों पर रखा गया है जबकि हकीकत में 105 स्कूलों के नामकरण के ऐसे प्रस्ताव धूल फांक रहे हैं। कई प्रस्ताव तो 8-10 साल से शिक्षा विभाग के पास लम्बित हैं लेकिन फैसला नहीं हो पा रहा। शहीदों के नाम पर स्कूलों के नामकरण करने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग के पास 72, प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के पास 33 प्रस्ताव लम्बित हैं। इनमें से सीकर के फतेहपुर स्थित उच्च माध्यमिक स्कूल के नामकरण के लिए तो ग्रामीण कई बार विभाग के अधिकारियों और मंत्री से मिल चुके हैं मगर नामकरण अब तक नहीं हुआ। जबकि इन प्रस्तावों का मामला विधानसभा में भी उठा था।
यह है प्रक्रिया
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नामकरण के लिए समय सीमा तय नहीं है। लोग जिला शिक्षा अधिकारी को प्रस्ताव देते हैं, जो निदेशालय में जाता है। वहां से सचिवालय जाने के बाद मंजूरी आती है।
सरकार द्वारा सेना और उसके वीर सिपाहियों के मान-सम्मान में उनकी वीरांगनाओं और परिवार को प्रोत्साहन के तौर पर धन राशि भी दी जाती है। सरकार शहीद के नाम पर सरकारी भवन का नाम रखती है। सरकार द्वारा शहीद कोटे तहत उनके परिवार के नाम पर गुजारे भत्ते हेतु पेट्रोल पंप भी आवंटित करती है।
Published on:
20 Apr 2018 09:41 am
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