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लगन के साथ जब मेहनत मिल जाती है तो सफलता और मंजिल की दूरी अपने आप कम होने लगती है। यह जरूरी नहीं कि पढऩे के लिए सारे संसाधन उपलब्ध हों तभी सफलता प्राप्त हो सकती है। संसाधनों का अभाव हो तो भी अगर ठान लो तो अपनी मंजिल के लिए रास्ता खुद बनाया जा सकता है। आम तौर पर सरकारी स्कूल में पढऩे वाली छात्राओं का जेईई मैंस (JEE Mains) जैसी परीक्षा में उत्तीर्ण होना किसी सपने से कम नहीं होता। वजह अतिरिक्त ट्यूशन का खर्च और हालात बदलने की भारी-भरकम चुनौतियां पग-पग पर आडे़ आती हैं। लेकिन उदयपुर जिले के मॉडल पब्लिक रेजीडेंसियल स्कूल ढीकली की पांच छात्राओं ने तमाम मुश्किलों को पछाड़ते हुए ऑनलाइन पढ़ाई की कलम से जीवन की कहानी उकेर दी।
आईएएस का सबक आया काम
स्कूल की छात्रा मनीषा भूरिया, निर्मला मीणा, अंजू कटारा, भगवती सिंगड़, और अमीषा मीणा ने जेईई मेंस (JEE Mains) में सफलता प्राप्त की । कॉर्डिनेटर व शिक्षक भीकम्बर सिंह ने बताया कि छात्राओं को तैयारी में परेशानी आई, लेकिन जनजाति अंचल में दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाली छात्राओं को आईएएस व जनजाति विकास विभाग की अतिरिक्त आयुक्त रुक्मिणी सिहाग ने नई राह दिखाई। उन्होंने विभाग के माध्यम से ईएमबीआईबीई ऑनलाइन कोचिंग के बारे में बताया। उन्हें विभाग से टेबलेट व रिचार्ज देकर नियमित ऑनलाइन कक्षाओं में पढ़ाई करवाई ।
ले जाएंगे बेंगलूरु
हम पांचों बेटियों को आईआईटी की तैयारी के लिए बेंगलूरु लेकर जा रहे हैं। हमने इस बार एक प्रोजेक्ट तैयार किया है, इसमें १०० छात्राओं को तैयार करने की योजना है। इसे लेकर केन्द्र सरकार से बजट की मांग कर रहे हैं। इस बार १३ ने ये परीक्षा दी थी, इसमें से पांच सफल हो गई। कुछ छात्राओं के नीट परीक्षा में भी सफल होने की संभावना है। -
रुक्मिणी सिहाग, तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त, जनजाति विकास विभाग उदयपुर
Published on:
03 May 2018 10:57 am
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