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हिंदी भाषा रोजगार का बहुत बड़ा माध्यम : योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ने कहा कि हिंदी भाषा (Hindi Language) देश के बड़े भूभाग को जोडऩे का कार्य करती है। हिंदी भाषा रोजगार का बहुत बड़ा माध्यम है और भारत के ऋषि संस्कृत को बहुत पहले ही रोजगार से जोड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने लखनऊ विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा महोत्सव-2020 कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ने कहा कि हिंदी भाषा (Hindi Language) देश के बड़े भूभाग को जोडऩे का कार्य करती है। हिंदी भाषा रोजगार का बहुत बड़ा माध्यम है और भारत के ऋषि संस्कृत को बहुत पहले ही रोजगार से जोड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने लखनऊ विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा महोत्सव-2020 कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि अगर संस्कृत पढऩे वाला व्यक्ति अपनी बुद्धि का सही ढंग से उपयोग करे तो वह कभी भूख से नहीं मर सकता। इसी प्रकार हिंदी भाषा भी रोजगार का माध्यम बन चुकी है। योगी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिंदी भाषा के महत्व को समझा और दुनियाभर में हिंदी को बढ़ाए जाने की वकालत की। साहित्य की एक लंबी कहानी है। दुनिया को साहित्य का पाठ हम भारतीयों ने पढ़ाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तुलसीदास जी ने अवधी में श्रीरामचरितमानस के माध्यम से बहुत कुछ दिया और श्रीरामचरितमानस किसी बंधन में नहीं बंधा। यह हिंदी, संस्कृत, तेलुगू, मलयालम, कन्नड़ में भी रचित है। अवधी को भले ही भारतीय संविधान ने मान्यता न दी हो, लेकिन भारत के श्रद्धालु लोग हर दिन श्रीरामचरितमानस (Shri Ramcharit Manas) का पाठ करते हैं। यह भारत की वास्तविक ताकत है और हमें इसे पहचानना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, आज हमें अपनी भारतीय भाषाओं के लिए भाषा विश्वविद्यालय की व्यवस्था करनी होगी। विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम तैयार कर डिमांड के अनुसार सप्लाई चेन तैयार करनी होगी। तभी हम प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में खड़े हो सकेंगे। संस्कृत के माध्यम से और हिंदी व अंग्रेजी की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त कर हम कई लोगों के लिए रोजगार का माध्यम बना सकते हैं।

उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में ऐसे कई विश्वविद्यालय हैं, जहां संस्कृत और हिंदी पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों की आवश्यकता है। ऐसे में विश्वविद्यालय अगर भाषाओं के बारे में शिक्षा देना शुरू कर दें तो दुनियाभर में शिक्षकों की आवश्यकता को पूरा किया जा सकता है।