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इन ट्रिक्स से होगा बच्चों का दिमाग तेज, बनेंगे होशियार, जाने सब कुछ

सोचें कि बच्चे कहां अपना समय व्यतीत करें, ताकि उनके जीवन पर अच्छा असर पड़े।

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जयपुर

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Sunil Sharma

Feb 03, 2019

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कॉलिन ओ मारा ‘वाशिंगटन पोस्ट’ में छपे अपने लेख में लिखती हैं, ‘आज बच्चे स्कूल व घर दोनों जगह डिजिटल स्क्रीन से चिपके रहते हैं। फुटबॉल, क्रिकेट जैसे खेल भी वे ऐप के मैदान में खेलते हैं। ऐसे बच्चों के अभिभावक उन्हें खुले मैदान में दौडऩे को प्रेरित करें। सोचें कि बच्चे कहां अपना समय व्यतीत करें, ताकि उनके जीवन पर अच्छा असर पड़े। इसके कुछ फायदे इस तरह हैं...

प्रदर्शन में सुधार
प्रकृति के पास समय गुजारने से बच्चे फिट रहते हैं। पढ़ाई में प्रदर्शन में सुधार होता है।

रचनात्मकता में वृद्धि
बाहर खेलने से कल्पना शक्ति में सुधार होता है और रचनात्मकता बढ़ती है।

नए दोस्त बनते हैं
बाहर बच्चे नए-नए खेल और नए दोस्त बनाते हैं।

सक्रियता ज्यादा
एकाग्रता बढऩे से काम में ध्यान लगता है। जबकि स्क्रीन पर सब कुछ धीमी गति से होने से तनाव बढ़ता है।

हड्डियां मजबूत
प्राकृतिक रोशनी शरीर को धूप देती है, जिससे हड्डियां मजूबत बनती हैं। हृदय रोग और मधुमेह से बचाव होता है।

आंखों की रोशनी में सुधार
मोबाइल में लगे रहने से आंखों की रोशनी कमजोर होती है। जबकि आउटडोर खेल इससे बचाते हैं।

बेहतर नींद
बाहरी खेल अवसाद से बचाते हैं। शारीरिक गतिविधियों की वजह से बच्चे अच्छे नींद सोते हैं।

ऐप की लत से बचने के लिए भी ऐप की मदद
एक मां अपनी सहेलियों को गर्व से बता रही थी, ‘बच्चों को स्मार्टफोन देने में कोई बुराई नहीं। अगर अभिभावक स्मार्ट हैं, तो बच्चों पर नजर रखी जा सकती है। फोन देने से पहले उन्हें उपयोग के बारे में सारी बातें समझाएं और उनकी सहमति के साथ उनके मोबाइल में पैरेंट ऐप इंस्टॉल करें। इससे विश्वास भी बना रहेगा और बच्चों को इसकी लत कम लगेगी।’

आज हम बच्चों को मोबाइल से पूरी तरह से दूर नहीं कर सकते, इसलिए उन्हें आपत्तिजनक सामग्री से दूर करने के लिए भी ऐप का सहारा लेते हैं। कुछ ऐसे ऐप और सॉफ्टवेयर हैं, जिनसे पेरेंट्स बच्चों द्वारा फोन के प्रयोग को आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं। ये इंटरनेट पर मौजूद ऐसी सामग्री को नियंत्रित या ब्लॉक करते हैं, जो अभिभावक नहीं चाहते कि उनके बच्चे देखें।