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सरकार ने नई भर्ती जारी तो कर दी लेकिन रीट के बाद आगे शिक्षक बनने तक की प्रक्रिया जब तक पूरी नहीं होती तब तक सरकारी विद्यालयों में हिंदी के शिक्षक गणित पढ़ाएंगे। उन्ही शिक्षकों में सभी विषयों को आपस में बांटकर व्यवस्था चलाई जाएगी। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति का भी रास्ता अभी साफ़ नहीं हो पाया। अतिथि शिक्षकों के लिए पोर्टल बनाकर साक्षात्कार प्रक्रिया चलाई गई थी। जिसके बाद विद्यालय मिलने थे। ऐसे सरकारी विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों द्वारा ही सभी विषयों की पढ़ाई करवाई जाएगी। उन्ही में सभी विषय बांटे जायेंगे। जब तक रिक्त पद भरे नहीं जाते।
राष्ट्रभाषा हिंदी को लेकर प्रदेश सरकार कितनी गंभीर है यह इस बात से ही साफ हो जाता है कि अब सरकारी मिडिल स्कूलों में अंगे्रजी, गणित और विज्ञान के टीचर बच्चों को हिंदी पढ़ाते नजर आएंगे। सरकार मानती है कि दूसरे विषय में पारंगत टीचर हिंदी के जानकार होंगे ही और हिंदी पढ़ा ही दंेगे। हैरत की बात यह है कि सरकार ने हिंदी शिक्षण की व्यवस्था को अंग्रेजी और उर्दू से भी नीचे
रखा है।
200 से ज्यादा छात्र तो ही...
युक्तियुक्त करण के तहत सरकारी स्कूलों की छठी से लेकर 9वीं तक तभी हिंदी का शिक्षक तैनात किया जाएगा जब छात्र संख्या दो सौ से ज्यादा होगी। अन्यथा दूसरे विषय के टीचर ही हिंदी पढ़ाने का काम करेंगे। एेसे में तकरीबन अस्सी फीसदी सरकारी स्कूलों से हिंदी शिक्षक का पद अपने आप समाप्त हो रहा है।
राज्य में इसी साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। और वर्तमान सरकार फिर से सत्ता में आने के लिए अपने हर पेंतरे को आजमाने की कोशिश करेगी। बेरोजगारों को और अतिथि शिक्षकों को भी खुश करे में पुरजोर कोशिश करेगी। अतिथि शिक्षकों को रीट में छूट दी गई थी। लेकिन नई भर्तियां ही युवा वर्ग को लुभाने का सबसे अच्छा जरिया हो सकता हैं।
Published on:
08 Jan 2018 09:30 am
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