
IIT
खडक़पुर। सेमेस्टर के शुरुआत में ही इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलोजी (आईआईटी)-खडक़पुर के विद्यार्थियों को जानी-मानी कंपनियों से 118 संक्षेप प्लेसमेंट मिले हैं। आईआईटीकेजीपी के करियर डवलपमेंट सेंटर के देबाशीष देब ने रविवार को बताया कि 11 अगस्त तक विप्रो और माइक्रोसॉफ्ट ने सबसे ज्यादा १४ लोगों को प्लेसमेंट का ऑफर दिया है। वहीं, क्वालकोल, सैमसंग और टैक्सास इंस्ट्रूमेंटस ने क्रमश: १३, १२ और ११ लोगों को नौकरी का ऑफर दिया है।
देब ने बताया कि आईटीसी, यूनीलीवर और अन्य कई कंपनियों ने वित्त, सॉफ्टवेयर, ऐनलिटिक और परामर्श जैसे क्षेत्रों में प्लेसमेंट का ऑफर दिया है। प्लेसमेंट सत्र के लिए यह अच्छी शुरुआत है। आमतौर पर शुरुआती स्तर पर १५ प्रतिशत प्लेसमेंट ऑफर किए जाते हैं। जैसे-जैसे सेमेस्टर आगे बढ़ेगा, वैसे ही प्लेसमेंट के लिए और कंपनियां आएंगी।
प्रोफेसर देब ने आगे बताया कि विद्यार्थियों को कंपनियों के सभी विभागों, जैसे कंप्यूटर सांइस इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग, यांत्रिक अभियांत्रिकी, रसायन इंजीनियरिंग, मनुष्य जाति संबंधी विज्ञान, सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र), आदि में में प्लेसमेंट मिला है।
उन्होंने कहा, प्लेसमेंट के लिए हम कई नई कंपनियों के अलावा उन कंपनियों से भी बात कर रहे हैं जो कैंपस प्लेसमेंट के लिए आ चुकी हैं। इनमें से कई ने सकारात्मक जवाब भी दिए हैं। हम उम्मीद कर हैं कि दिसंबर में प्लसेमेंट के लिए करीब २५० कंपनियां आएंगी।
प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को गंभीरता से ले सरकार
नई दिल्ली। सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय से संबद्ध एक संसदीय स्थायी समिति ने दिव्यांगों की ‘प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना’ के विफल होने पर रोष प्रकट करते हुए कहा है कि सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। संसद में हाल में ही पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार दिव्यांगों के लिए ‘प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना’ के तहत प्रतिवर्ष 46 हजार छात्रवृत्तियां निर्धारित की गई हैं, जबकि इनका वितरण नहीं किया जा सका है।
सरकार ने सूचित किया है कि योजना के तहत वर्ष 2015-16 में 3878 और वर्ष 2016-17 में 16 हजार 574 दिव्यांगों को ये छात्रवृत्ति दी गई हैं। विफल क्रियान्वयन पर सरकार ने स्पष्टीकरण करते हुए कहा कि राज्य सरकारों ने दिव्यांगों की प्रमाणित सूची नहीं भेजी और छात्रवृत्ति के लिए आवेदन के लिए निर्धारित - नेशनल ई पोर्टल खराब रहा जिससे दिव्यांग समय पर आवेदन नहीं सके।
हालांकि, समिति ने सरकार के इस जवाब पर रोष प्रकट किया है और कहा कि सरकार को इस संबंध में बेहतर समन्वय करना चाहिए और नेशनल ई पोर्टल का संचालन ठीक करना चाहिए। समिति ने कहा है कि सरकार का जवाब नियमित है और लचर है। समिति ने कहा है कि सरकार को दिव्यांगों को छात्रवृत्ति देने के लिए एक निश्चित रणनीति बनानी चाहिए जिससे आने वाले वर्षों में इस योजना का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। इसके लिए राज्य सरकारों और संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील बनाया जाना चाहिए और समन्वय के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए।
राज्य सरकारों पर योजनाएं लागू करने और समय पर आवंटन करने के लिए ‘उपयोग प्रमाण पत्र’ भेजने पर बल देना चाहिए। बेहतर क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार के अधिकारियों को नियमित रूप से राज्यों के मुख्यमंत्रियों तथा संबंधित मंत्रियों के साथ नियमित बैठक करनी चाहिए। इन योजनाओं में स्थानीय सांसदों और विधायकों को भी शामिल करना चाहिए। केंद्र सरकार ने अप्रैल 2017 में दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 लागू कर दिया और इसके लिए जून 2017 को अधिसूचना जारी कर दी गयी था। इसका मूल उद्देश्य दिव्यांगों के लिए उचित माहौल बनाना तथा उनको समाज में समान अवसर उपलब्ध कराना है।
Published on:
14 Aug 2017 04:04 pm
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