
success
फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी बता रहे हैं कि सफलता के मायने क्या होते हैं-
मैं सिंधी परिवार से हूं। कॉमर्स ग्रेजुएट, क्योंकि डॉक्टर या इंजीनियर बनने जितने माक्र्स मेेरे नहीं थे। बाद में पिताजी के टाइपिंग सिखाने वाले व्यवसाय में आ गया। एक बार मैंने 40 दिन में 40 टाइपराइटर बेचने का करिश्मा भी किया है। हालांकि, इच्छा फिल्मों में एक्टिंग करने की थी इसलिए थियेटर करता रहा और नागपुर से पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट पहुंच गया। एक्टिंग की बजाय वहां एडिटिंग कोर्स में दाखिला मिला। इसके बाद मुंबई में अपने हिस्से का संघर्ष किया और डायरेक्टर बन बैठा। हमारे पास न केवल पाने, बल्कि देने के लिए भी बहुत कुछ है लेकिन हमारा ध्यान हमेशा इस पर रहता है कि हमने क्या खो दिया है! दिल से पूछिए, कोई तो काम ऐसा होगा, जिसे करते हुए बिना शिकवा-शिकायत आप अपनी उम्र बिता सकते हैं!
एक शाम मैं और मेरा दोस्त भूतों की बातें कर रहे थे। पिताजी ने सुन लिया और समझाया कि भूत होते ही नहीं लेकिन हम डर से कांप रहे थे। उसी रात पिताजी अपने साथ मुझे अंधेरे में डूबी एक सूनी सडक़ पर घुमाने निकल पड़े। भूत कहीं नहीं दिखे लेकिन पलटकर डर का सामना करना आ गया। समझ आ गया कि आशंकाओं के अंधेरे में भूतों की तलाश से ज्यादा अच्छा है संभावनाओं के उजले आसमान में उम्मीदों के इंद्रधनुष तानना।
झूठों के नहीं होते भगवान
आपने गौर किया हो तो ईश्वर की बनाई इस सृष्टि में दो कंकड़ भी एक जैसे नहीं होते। यह आपके अपने अस्तित्व की मौलिकता ही है जो आपको भीड़ का हिस्सा होने से बचाती है और इसी मौलिकता की रक्षा करके एक दिन आप वह पा लेते हैं, जिसे सफलता कहा जाता है। बेशक, रचनात्मकता कुछ अलग कर दिखाने से जुड़ी हुई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप घोड़े को गाड़ी के पीछे जोत कर खुद को रचनात्मक मानने लगे। रचनात्मकता का एक बहुत बड़ा पक्ष उसकी उपयोगिता से भी जुड़ा हुआ है। आपकी क्रिएटिविटी से चीजों का पहले से बेहतर होना जरूरी है।
Published on:
23 Jul 2018 10:15 am
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