
manoj bajpai
एक्टर मनोज बाजपेयी बता रहे हैं कि उन्होंने अपने जीवन में सफलता कैसे प्राप्त की- दिल्ली में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा ने मुझे चार बार रिजेक्ट किया, जी हां, चार बार! एक्टिंग के लिए मेरा जुनून ही था कि थिएटर करते हुए एक दिन संयोग से बैरी जॉन जैसे अभिनय के गुरु की संगत मिली और कहानी बदल गई। अब खुद इंस्टीट्यूट वाले बतौर गेस्ट-टीचर एक्टिंग सिखाने के लिए मौके-मौके पर मुझे बुलाते रहते हैं। राजधानी में रहने के शुरुआती दिनों में बिहार के हम बहुत-से लोग एक कमरे में रहते थे। उनमें से कई आज भी मेरे दोस्त हैं। मैं मानता हूं कि इंसान को बनाने-बिगाडऩे में संगत का बड़ा हाथ होता है। जहां तक हो सके अपनी संगत, ऐसे लोगों की रखिए, जिनसे आप कुछ सीख सकें। जो आपके आत्मविश्वास को जगाए रखे और संघर्ष में हार न मानने का हौसला दें। जाते-जाते कहूंगा कि देखो भाई, पैशन पर बोझ न बनो! नौकरी छोडऩे की वजह होगी बॉस से नफरत और आप बताओगे कि एक्टर, सिंगर या बिजनेसमैन बनना था, इसलिए नौकरी छोड़ी! मैं कहूंगा कि यह खुद से झूठ बोलना है। जीवन से जो चाहते हैं, उसका बिलकुल सटीक आकलन करें। जुनून असली होगा तो आपको अपने आप बहा ले जाएगा। अगर दूसरों को देखकर खुद को भुलाओगे तो जीवन में बड़ी परेशानी आएगी।
आप जीवन से जो चाहते हैं, उसका बिलकुल सटीक आकलन करें। अगर जुनून असली होगा तो आपको अपने आप बहा ले जाएगा।
अगर आपका जुनून सच्चा है तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहां से आए हैं। मैं बिहार में नेपाल की सीमा से लगते एक छोटे-से गांव बेलवा में पांचवी तक झोपड़ी वाली बेनामी पाठशाला में पढ़ा, जिला बेतिया से 12वीं की और फिर दिल्ली आ गया। किसान के इस बेटे ने बॉलीवुड का सपना देखा था। दिल्ली आकर किसी भी आम इंसान की तरह धक्के खाए और सपने देखे। उस दिन के, जब रूपहला परदा मेरा होगा और प्रशंसकों की बड़ी तादाद होगी, जब बैंक में पर्याप्त पैसा होगा और दिल में रचनात्मक संतुष्टि होगी। आज वह सब है। यह सब कुछ जीवन में तब संभव हुआ, जब मैंने सपने देखने शुरू किए।
Published on:
27 May 2018 10:29 am
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