
पुरस्कार पाकर खिले चेहरे, बाबा रामदेव बाल सत्संग सुधा में सम्मानित होते बच्चे।
ग्रंथों की महत्ता के बारे में सरल जानकारी
कार्यक्रम में बाल सत्संग सुधा के संस्थापक सदस्य बालकृष्ण सराफ ने बच्चों को श्रीमद्भागवत गीता, रामायण तथा भारतीय संस्कृति के अन्य महान ग्रंथों की महत्ता के बारे में सरल और प्रेरणादायक ढंग से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाल्यकाल में दिए गए अच्छे संस्कार ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनते हैं और धार्मिक ग्रंथ जीवन में सत्य, सेवा, अनुशासन और कर्तव्य का मार्ग दिखाते हैं।
हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ
इस अवसर पर कई बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ किया, जिसे सुनकर उपस्थित जनों ने उनकी सराहना की। बच्चों ने अपनी-अपनी प्रतिभा के अनुसार धार्मिक प्रसंग, भजन और विचार भी प्रस्तुत किए। कायक्रम के अंत में उत्साहवर्धन के लिए बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए गए। पुरस्कार प्राप्त कर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे और उनमें आगे भी नियमित रूप से सत्संग में भाग लेने का उत्साह दिखाई दिया।
आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार
आयोजकों ने बताया कि बाल सत्संग सुधा का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक विचारों से जोडऩा है, ताकि बच्चे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कारों को भी अपने जीवन में आत्मसात कर सकें। कार्यक्रम में बाल सत्संग सुधा के सदस्य राजेश रावल भी उपस्थित थे।
Published on:
10 Jun 2026 09:29 pm
बड़ी खबरें
View Allहुबली
कर्नाटक
ट्रेंडिंग
