
Barack Obama
अब वो जमाना नहीं रहा। बहुत कुछ बदल गया है। यकीनन, परिवर्तन संसार का नियम है, लेकिन बदलाव अच्छे के लिए हो, तो खुशी देता है और यदि बदलाव की बयार गलत दिशा की ओर हो, तो कुछ भी ठीक नहीं रहता। इस बदलते दौर में यदि हम स्कूल-कॉलेजों में आए बदलाव को देखें, तो इसमें सकारात्मकता कम नजर आती है, जबकि नकारात्मकता कहीं ज्यादा नजर आती है। स्कूल में बच्चों को न तो कोई टीचर डांट सकता, न डरा सकता है। यदि ऐसा किया तो दूसरे दिन पैरेंट्स स्कूल पहुंच जाते हैं। बिना कुछ जाने-समझे बखेड़ा खड़ा कर देते हैं। पैरेंट्स की इन्हीं आदतों के चलते बच्चों के मन से न सिर्फ टीचर का डर खत्म हो रहा है, बल्कि आदर-सम्मान करना भी भूलते जा रहे हैं।
इसी का दूसरा पहलू यह भी है कि स्कूल में छात्र एक-दूसरे से लड़ाई-झगड़ा करने से भी नहीं हिचकिचाते हैं। इस तरह की नकारात्मकता के लिए पैरेंट्स ही जिम्मेदार हैं। बच्चों के आपसी झगड़े में पैरेंट्स को कभी नहीं कूदना चाहिए, बल्कि उन्हें मोटिवेट करना चाहिए, जबकि अधिकांश पैरेंट्स ऐसा नहीं करते। अकसर देखने में आता है कि कोई बच्चा जैसे ही स्कूल की लड़ाई-झगड़े की बात घर में शेयर करता है, ऐसे में पैरेंट्स उग्र हो जाते हैं और स्कूल में जाकर न सिर्फ शिकायत करते हैं, बल्कि बच्चे की ओर से बदला लेेने में उतर आते हैं।
दरअसल, जब कोई छात्र स्कूल में पिटता है और चुप रहकर, उसकी शिकायत घर में करता है, तो पैरेंट्स को समझना चाहिए कि बच्चे में मुकाबला करने की क्षमता कहीं कमजोर तो नहीं है। इसके उलट जो बच्चे हिंसक होते हैं, उनके पैरेंट्स की जिम्मेदारी बनती है कि वो बच्चे के स्वभाव को हिंसक नहीं, बल्कि रक्षात्मक बनाने में मदद करें। इस मामले में आज के सभी पैरेंट्स और बच्चों के लिए बराक ओबामा से जुड़ा एक स्कूल का मामला प्रेरणा दायक हो सकता है।
असल में यह मामला उस वक्त का है, जब बराक ओबामा स्कूल में पढ़ते थे। वे जितने पढ़ाकू थे, उतनी ही रुचि उनकी Sports में भी थी। बास्केटबॉल खेलने का उन्हें बहुत शौक था। एक बार ऐसे ही एक छात्र ने उनसे उनकी बॉल छीन ली। उन्होंने इसका विरोध तो किया, लेकिन काफी लचीले अंदाज में, लेकिन बदले में उन्हें जोर का थप्पड़ पड़ गया। वह सहम गए, लेकिन कुछ कहा नहीं। शांत रहे और घर जाकर अपने सौतेले पिता से इसकी शिकायत की और कहा कि इसके लिए उसे सजा जरूर मिलनी चाहिए।
ओबामा के सौतेले पिता समझदार थे। वो बराक की शिकायत पर थप्पड़ मारने वाले को सबक सिखाने के लिए स्कूल नहीं गए, बल्कि वो 2 बॉक्सिंग ग्लब्ज लेकर आए। एक ग्लब्ज खुद पहना और एक ओबामा को दिया। बराक के पिता ने उनके मुंह पर एक जोर का पंच मारा और कहा की 'अपनी रक्षा करो।' ओबामा ने सुरक्षा में अपना हाथ चेहरे पर रखा, तभी पिता ने एक और पंच उनके मुंह पर दे मारा और कहा-'हमेशा चौकन्ना रहो।' सौतेले पिता की इस सीख ने बाराक को बहुत प्रभावित किया। उन्होंने रक्षा करने और हमेशा चौकन्ना रहने की बात को अपने जीवन में उतार ली। उनका मानना था कि खुद की रक्षा करना, दूसरों की रक्षा करना, हमेशा चौकन्ना रहना जिंदगी में आगे बढऩे के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं। यह सब अच्छी परवरिश से मिलता है। वर्तमान दौर में परवरिश के मायने बदल गए हैं। बच्चों को रक्षात्मकता की बजाय हिंसात्मकता की सीख दी जा रही है।

Published on:
05 May 2018 06:28 pm
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