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180 में से सिर्फ 3 अंक लाने पर भी मिल रहा कॉलेजों में एडमिशन, जानिए क्यों हो रहा ऐसा

180 में से सिर्फ 3 अंक लाने पर भी छात्रों का कॉलेजों में एडमिशन हो रहा है।

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Anil Kumar

Jun 19, 2018

Admission in Medical college

180 में से सिर्फ 3 अंक लाने पर भी मिल रहा कॉलेजों में एडमिशन, जानिए क्यों हो रहा ऐसा

डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए यह शैक्षणिक सत्र शानदार साबित हो रहा है। इस बार बेहद कम अंक लाने वाले छात्रों का भी मेडिकल कॉलेजों में आसानी से दाखिला हो रहा है। हालांकि देशभर में मौजूद मेडिकल छात्रों की संख्या की तुलना में मेडिकल कॉलेजों में सीटें कम हैं, लेकिन इसके बावजूद ऐसा हो रहा है। इस बार 180 में से सिर्फ 3 अंक लाने वाले छात्रों को भी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिल रहा है। दरअसल मेडिकल कॉलेजों की पूरी सीटें भरने के लिए एंट्रेंस टेस्ट में बहुत ही कम अंक लाने वालों को भी काउंसलिंग में शामिल किया जा रहा है। इसका मतलब पर्सेंटाइल बेसिस पर इंडिविजुअल सब्जेक्ट में पासिंग अंक से कम भी नंबर आए तो भी आप नीट काउंसलिंग में हिस्सा ले सकते हैं।


केमेस्ट्री में 180 में से सिर्फ 3 अंक लाने पर भी काउंसलिंग
इस बार मेडिकल की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स के फिजिक्स में केवल 5 फीसदी, कैथ्मस्ट्री में 10 फीसदी से कम अंक लाने वाले छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिया जा रहा है। बायोलॉजी में महज 20 फीसदी अंक लाने वाले छात्रों को भी मेडिकल कॉलेजों दाखिला मिल रहा है। इस बार ग्रामीण क्षेत्र की मेडिकल सीटों को भरने के लिए 50वीं पर्सेंटाइल वाले अभ्यर्थियों को भी योग्य माना जा रहा है। वहीं, रिजर्व कैटेगरी में 40 फीसदी अंकों वालों को भी योग्य माना जा रहा है। इसमें सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जनरल कैटेगरी के जिन अभ्यर्थियों के 720 में से कुल 119 अंक हैं, उनके फिजिक्स में 180 में से 7 मार्क्स यानी 3.8 फीसदी और केमेस्ट्री में 180 में से सिर्फ 3 अंक यानी 1.6 फीसदी और बायोलॉजी में 30.27 फीसदी अंक हैं उनको भी काउंसलिंग के लिए योग्य माना गया है।


इसलिए हो रहा ऐसा
दरअसल इस बार सरकार नहीं चाहती मेडिकल कॉलेजों में 1 भी सीट खाली रहे इस वजह से ज्यादा से ज्यादा छात्रों को काउंसलिंग में शामिल किया जा रहा है।

इनको माना जा रहा योग्य
इस बावर 10 छात्र हर सीट के लिए योग्य माने गए हैं। इस साल जनरल कैटेगरी में 119 कट अॉफ मार्क्स रही है। वहीं, नीट 2018 में छात्रों की संख्या 13 .26 लाख रही है। इसके विपरीत जेईई में यह आंकड़ा 10.43 लाख का रहा है।


ये है पर्सेंटाइल सिस्टम
नीट में साल 2016 में पर्सेंटाइल सिस्टम लागू किया गया था। इसके लिए जनरल कैटेगरी के छात्रावें के कट ऑफ 50% और रिजर्व कैटेगरी के लिए 40% रखी गई थी। इस वजह से 18-20 फीसदी अंकों वालों को भी काउंसलिंग में भाग लेने का मौका मिला रहा है। इस समय भारत में 60 हजार से ज्यादा एमबीबीएस सीटें हैं।

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