
NEET
नई दिल्ली। तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि आठ सितम्बर को सर्वोच्च न्यायलय द्वारा राज्य में NEET विरोधी आंदोलन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से कोई नया आंदोलन नहीं सामने आया है। सर्वोच्च न्यायलय ने मेडिकल के स्नातक और परास्नातक विषयों में दाखिले के लिए नीट को अनिवार्य कर दिया है।
महान्यायवादी (एजी) के.के. वेणुगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की पीठ से कहा कि 8 सितम्बर को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सभी नीट विरोधी प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने के निर्देशों का पालन करते हुए राज्य के मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टर से शीर्ष न्यायालय के आदेश पर तुरंत अमल के लिए कहा।
उन्होंने अदालत को बताया, जिले के अधिकारियों को किसी भी नए नीट विरोधी आंदोलन के बारे में कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। एजी के बयान के बाद पीठ ने तमिलनाडु सरकार से इस पर एक हलफनामा देने को कहा। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को करने का निर्देश दिया है। सर्वोच्च न्यायलय ने 8 सितम्बर को अधिवक्ता जी.एस मनी की राज्य में सभी नीट विरोधी आंदोलनों पर प्रतिबंध लगाने की याचिका पर यह आदेश दिया था।
कानून मंत्रालय ने NEETपर तमिल नाडु के अध्यादेश को मंजूरी दी
केंद्रीय कानून मंत्रालय ने बुधवार को तमिल नाडु के उस अध्यादेश को मंजूरी दे दी जिसके तहत मेडिकल के स्टुडेंट्स एमबीबीएस और डेंटल कोर्स में दाखिला लेने के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में शामिल नहीं हो सकते। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी। कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने महान्यायवादी के के वेणुगोपाल के साथ चर्चा करने के बाद अध्यादेश के प्रालेख को मंजूरी दे दी।
अधिकारी ने बताया कि अध्यादेश सिर्फ सरकारी कॉलेजों पर लागू होगा, निजी कॉलेजों पर नहीं। नीट को लेकर तमिल नाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी, राज्य के मंत्री और लोकसभा के उपाध्यक्ष एम थंबीदुराई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई बैठकें की थी। उल्लेखनीय है कि नीट वह प्रवेश परीक्षा है जिसके जरिए उम्मीदवार सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और डेंटल कोर्स करते हैं। परीक्षा का आयोजन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) करवाता है।
नीट ने ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट (एआईपीएमटी) और राज्यों या कॉलेजों द्वारा करवाए जाने एमबीबीएस परीक्षा की जगह ली है। हालांकि, कई कॉलेजों और इंस्टीट्यूटस ने नीट पर स्टे लेकर खुद के एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स के लिए स्वयं के टेस्ट आयोजन करवाए थे। गौरतलब है कि शुरुआत में खुद को नीट से स्थायी तौर बाहर रखने के लिए तमिल नाडु सरकार ने विधानसभा में दो विधेयक पारित किए थे, लेकिन बाद में साल या दो साल इससे दूर रहने की काफी कोशिश की थी।
Published on:
18 Sept 2017 10:05 pm
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