कॉलेज के स्टूडेंंट्स को अब सीखेंगे 'जीवन कौशल'

कॉलेज के स्टूडेंंट्स को अब सीखेंगे 'जीवन कौशल'
Life Skills

Jamil Ahmed Khan | Updated: 11 Sep 2019, 08:26:49 PM (IST) शिक्षा

अब देश के विश्वविद्यालयों में बीए के छात्रों को 'जीवन कौशल' (Life Skills) सिखाया जाएगा और इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission) (यूजीसी) (UGC) ने एक पाठ्यक्रम तैयार किया है। केन्द्रीय मानव संसाधन एवं विकास राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने इस पाठ्यक्रम की जानकारी दी।

अब देश के विश्वविद्यालयों में बीए के छात्रों को 'जीवन कौशल' (Life Skills) सिखाया जाएगा और इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission) (यूजीसी) (UGC) ने एक पाठ्यक्रम तैयार किया है। केन्द्रीय मानव संसाधन एवं विकास राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने इस पाठ्यक्रम की जानकारी दी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष धीरेन्द्र पाल सिंह, उपाध्यक्ष भूषण पटवर्धन एवं सचिव प्रोफेसर रजनीश जैन भी मौजूद थे। धोत्रे ने कहा कि कई छात्र परीक्षा में रट्टा मारकर अंक तो पा लेते हैं, लेकिन कई अच्छे अंक तो नहीं प्राप्त करते पर उनके पास ज्ञान अधिक होता है और वे कौशल की कमी के कारण भी पिछड़ जाते हैं। इसलिए उनके कौशल विकास के लिए यह पाठ्यक्रम तैयार किया गया है, लेकिन उन्हें संप्रेषण एवं प्रबंधन कौशल के साथ-साथ उनमें सार्वभौमिक मानव मूल्य भी विकसित करना जरूरी है, इसलिए इसका नाम 'जीवन कौशल' रखा गया है।

यूजीसी के अध्यक्ष धीरेन्द्र पाल सिंह ने बताया कि छात्रों को 'जीवन कौशल' सिखाने के लिए शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा और इसके लिए प्रशिक्षक की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने आगे बताया कि विश्वविद्यालय और कॉलेज आपस में समन्वय कर इस पाठ्यक्रम को लागू करेंगे एवं अगले सत्र से यह पूरी तरह लागू हो जाएगा और कॉलेज चाहे तो इसे अगले सेमेस्टर से लागू कर सकता है। 'जीवन कौशल' सीखने के बाद स्टूडेंट्स को क्रेडिट दिए जाएंगे और अंत में उन्हें एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा। यह पूछे जाने पर कि क्या इस 'जीवन कौशल' को अनिवार्य बनाया जाएगा या स्वैच्छिक, यूजीसी की अतिरिक्त सचिव रेणु बत्रा ने कहा कि अभी इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

'जीवन कौशल' पाठ्यक्रम में कुल 120 घंटे की व्यावहारिक पढ़ाई होगी और आठ क्रेडिट प्रदान किए जाएंगे। सम्प्रेषण कौशल के लिए 30 घंटे होंगे जिनमें वाचन-पाठन डिजिटल साक्षरता श्रवण सोशल मीडिया गैर मौखिक सम्प्रेषण के लिए तीन से छह घंटे तक अलग-अलग विषयों की पढ़ाई होगी। इसी तरह पेशेवर कौशल नेतृत्व,कौशल और सार्वभौमिक मानव मूल्य के लिए भी 30.30 घंटे की पढ़ाई होगी। छात्रों को साक्षात्कार कौशल, समूह परिचर्चा, विचार मंथन, नैतिक आचार, प्रेम, करुणा, अहिंसा, शांति, त्याग और सेवा के मूल्यों को भी सिखाया जाएगा। यूजीसी के अध्यक्ष ने कहा कि 'जीवन कौशल' को मूक्स में भी लागू किया जाएगा।

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