पराक्रम दिवस 2021: जब सुभाष चंद्र बोस ने देश को आजाद कराने के लिए लड़ी जंग

  • पराक्रम दिवस 2021:
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन को सरकार ने 'पराक्रम दिवस' के रूप पर मनाने की घोषणा
  • इस वर्ष को सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती वर्ष के रूप में मनाया जाएगा।

By: Deovrat Singh

Published: 22 Jan 2021, 10:20 AM IST

पराक्रम दिवस 2021: देश के महान राष्ट्रवादी, स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन को सरकार ने 'पराक्रम दिवस' के रूप पर मनाने की घोषणा की है। इस वर्ष को सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। भारत सरकार ने इसके लिए गजट नोटिफिकेशन भी जारी किया है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी सन् 1897 को ओडिशा के कटक शहर में जानकीनाथ बोस के घर हुआ था। उनकी मां का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोस 'कटक' के मशहूर वकील थे। अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें रायबहादुर का खिताब दिया था। बोस के पिता उन्हें आईसीएस ऑफिसर बनाना चाहते थे, और इसी कारण से उन्होंने सुभाष चंद्र बोस को विदेश भेज दिया था। 1920 में बोस ने आईसीएस की वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त किया।

लेकिन नेताजी के दिलो-दिमाग पर तो स्वामी विवेकानंद के आदर्शों का कब्जा था। ऐसे में वे आईसीएस बनकर अंग्रेजों की गुलामी कैसे करते! इसलिए उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया। 1928 में जब साइमन कमीशन भारत आया तब कांग्रेस ने उसे काले झंडे दिखाए। कोलकाता में सुभाष चंद्र बोस ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया।

उनका नारा 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा' भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है। कहा जाता है कि जब नेता जी ने जापान और जर्मनी से मदद लेने की कोशिश की थी तो ब्रिटिश सरकार ने 1941 में उन्हें मारने का आदेश दिया था।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस किसी भी कीमत पर अंग्रेजों के साथ समझौता नहीं करना चाहते थे। उनका लक्ष्य भारत को आजाद करवाना था। शुरुआत में नेताजी महात्मा गांधी के साथ जुड़े, लेकिन बाद मे उन्होंने अलग होकर साल 1939 में फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की। नेताजी बोस ने द्वितीय विश्व युद्ध में भारत के शामिल होने का विरोध किया, तो अंग्रेजों ने उन्हें जेल में डाल दिया। जहां नेताजी भूख हड़ताल पर बैठ गए तो अंग्रेंजों ने उन्हें जेल से रिहा कर, घर में उन्हें नजरबंद कर दिया।

आज़ाद हिंद फौज की कमान
जब नेताजी जापान में थे, तब आजाद हिंद फौज के संस्थापक रासबिहारी बोस ने उन्हें आमंत्रित किया। डॉक्टर राजेंद्र पटोरिया की किताब 'नेताजी सुभाष' के अनुसार "4 जुलाई 1943 को सिंगापुर के कैथे भवन में एक समारोह के अंदर रासबिहारी बोस ने आज़ाद हिंद फौज की कमान सुभाष चंद्र बोस के हाथों में सौंप दी।" इसके बाद नेताजी ने इस फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार बनाई, जिसे कोरिया, चीन, जर्मनी, जापान, इटनी और आयरलैंड समेत नौ देशों ने मान्यता भी दी।

एमिली शेंकल से किया प्रेम विवाह
सन् 1934 में बोस की मुलाकात एमिली शेंकल से हुई और इस दौरान दोनों में प्रेम विवाह हो गया। 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमांडर' के रूप में नेता जी ने अपनी सेना को 'दिल्ली चलो' का नारा दिया। 1944 को आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों पर आक्रमण किया और कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त भी करा लिया। सुभाष चंद्र बोस को 11 बार जेल हुई। भारत में रहने वाले उनके परिवार के लोगों का आज भी यह मानना है कि सुभाष चंद्र बोस की मौत 1945 में नहीं हुई बल्कि वे रूस में नजरबंद थे।

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