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Education News आरटीई लॉटरी में पहला स्थान, फिर भी प्रवेश नहीं
निजी स्कूलों की मनमानी अभिभावकों और गरीब परिवारों को बहुत भारी पड़ती है। स्कूल संचालक बच्चे के स्कूल में प्रवेश लेने से टी.सी. देने तक अपनी मनमर्जी करते हैं। जहाँ गरीब बच्चों के लिए सरकार द्वारा आरटीई का दायरा बढ़ाया गया है और स्कूलों को शुल्क भुगतान किया जा रहा है। ऐसे में निजी स्कूल संचालक अपनी इच्छा और मनमर्जी से आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश देते हैं।
निजी स्कूलों की आरटीई के तहत प्रवेश देने के मामले में भी मनमानी सामने आई है। सामने आया है कि गरीब बच्चों के बजाए कई स्कूल चहेतों के बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश दे रहे हैं। लॉटरी में नंबर आने व पूरे दस्तावेज जमा कराने के बावजूद गरीबों बच्चों को गुमराह कर रहे हैं। उनकी जगह रैंकिंग में नीचे रहे बच्चों को प्रवेश दिए जा रहे हैं।
इधर इसलिए नहीं हो रहे प्रवेश
कई जगह प्रक्रिया में खामियां छोडऩे के कारण भी कई अभिभावक मायूस हो रहे हैं। कहीं ऑनलाइन आवेदन के समय निवास स्थान का वार्ड गलत चुन लिया तो कहीं अन्य खामी छोड़ दी। ऐसे में बच्चों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा।
&कई जगह अभिभावकों से खामियां छूट रही हैं। स्कूल पात्र और चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं तो यह गलत है। इस पर कार्यवाही की जाएगी।
रतनसिंह यादव, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक प्रथम)
यह है बानगी
केस 01 : प्रतापनगर निवासी मुकेशकुमार बंजारा ने बेटी संजना के आरटीई में प्रवेश के लिए कई स्कूलों में आवेदन किए। वार्ड ४७ के नामी स्कूल में संजना को सूची में पहली प्राथमिकता मिली। मगर सभी दस्तावेज जमा कराने के बावजूद प्रवेश नहीं दिया गया।
केस 02 : पांच्यावाला निवासी पूनम सेन ने बेटी साक्षी (5) के लिए आरटीई में आवेदन भरा। उसी वार्ड के एक स्कूल में बेटी को दूसरी प्राथमिकता मिली। दस्तावेज जमा कराने के बावजूद स्कूल ने बच्ची के बजाय भाई-बहनों का दाखिला कराने का दबाव डाला। आधी फीस देने को कहा। अब कह दिया अभी प्रवेश नहीं हुआ है, बाद में देखेंगे। पूनम उलझन में है कि दाखिला अन्य स्कूल में कराए या नहीं।
Published on:
14 Apr 2018 09:05 am
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