
phd uniraj
Rajasthan University में एमफिल व पीएचडी की 50 प्रतिशत सीटें खाली ही रहेंगी। विभिन्न विषयों में पीएचडी और एमफिल की 585 सीटों के लिए हुई एमपैट परीक्षा में 2506 अभ्यर्थी बैठे। इनमें 442 विद्यार्थी ही पास हो पाए। इसके चलते पीएचडी की 337 सीटों में 167 और एमफिल में 248 में से करीब 114 सीट खाली ही रहेंगी।
कठोर नियम ने फेरा पानी
विवि ने इस बार प्रवेश परीक्षा को नए नियम से आयोजित करवाई थी। नियमों के अनुसार एमपैट परीक्षा में दो पेपर हुए थे। जिसमें पहले कॉमन पेपर में पास होने के लिए पचास प्रतिशत अंक लाने जरूरी थे। तभी द्वितीय पेपर के लिए क्वालिफाई माना जाना था। इस नियम के चलते अधिकतर विद्यार्थी पहला पेपर ही पास नहीं कर पाए, जिससे उनके दूसरे पेपर में आए अंकों को जोड़ा ही नहीं गया।
एबीवीपी ने किया प्रदर्शन
एमपैट के नए नियम के कारण खाली रही सीटों के विरोध में मंगलवार को एबीवीपी ने कुलपति सचिवालय पर प्रदर्शन किया। विवि के एबीवीपी इकाई अध्यक्ष हुश्यार मीना ने बताया नए नियम से एमपैट करवाने से ढ़ाई साल से पीएचडी करने की आस लगाए विद्यार्थियों को धक्का लगा है। ऐसे में छात्रों को एक मौका ओर दिया जाना चाहिए।
23 प्रतिशत प्रश्न हटाने पर विवि रजिस्ट्रार को नोटिस, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दी अंतरिम राहत
हाईकोर्ट ने राजस्थान विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर (भौतिकी) भर्ती परीक्षा से 23 प्रतिशत प्रश्न हटाने के मामले में रजिस्ट्रार से जवाब तलब किया है। साथ ही, याचिकाकर्ताओं को अंतरिम तौर पर भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायाधीश वी एस सिराधना ने नंदलाल व अन्य की याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया। प्रार्थीपक्ष की ओर से अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने कोर्ट को बताया कि इस भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा के 180 में से 41 प्रश्न हटा दिए गए, जो कि 23 प्रतिशत हैं। इसके कारण प्रार्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गया। एेसे में या तो याचिकाकर्ताओं को चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए या भर्ती को रद्द किया जाए।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को चयन प्रक्रिया में शामिल करने का अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं का परिणाम अदालत की अनुमति बिना जारी नहीं किया जाए।
Published on:
09 May 2018 09:11 am
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