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राजस्थान विश्वविद्यालय ने एक आरटीआइ के जवाब में जो जानकारी दी है, उसने समूचे शिक्षा जगत को हैरान कर दिया है। विवि ने जवाब में कहा है कि विवि के यूरोपियन लैंग्वेंज, लिटरेचर एंड कल्चरल स्टडीज विभाग में विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षक पढ़ा रहे हैं। एवज में विवि उन्हें लाखों का भुगतान कर रहा है। विभाग में पिछले कई वर्षों से गेस्ट फैकल्टी के भरोसे कक्षाएं चल रही हैं। नियम-कायदे दरकिनार कर विवि प्रशासन गेस्ट फैकल्टी में निजी स्कूलों के शिक्षकों को बुला रहा है। निजी स्कूलों के शिक्षक रोजाना 3 कक्षाएं ले रहे हैं। एवज में उन्हें रोजाना 1500 रुपए तक भुगतान किया जा रहा है। सूचना के अधिकार के तहत विवि के सेवानिवृत्त प्रोफेसर आरबी सिंह ने विवि से विभाग में गेस्ट फैकल्टी के बारे में जानकारी मांगी तो विवि ने उक्त स्थिति स्वीकार की। विवि ने बताया कि गेस्ट फैकल्टी के तौर पर जिन्हें बुलाया जा रहा है, वे निजी स्कूलों के शिक्षक हैं। उनकी योग्यता केवल संबंधित विषय में एमए है।
एक साल में दिए 3.53 लाख रुपए: विवि में बतौर गेस्ट फैकल्टी 6 शिक्षक तय किए गए हैं। इनमें केवल एक ही विवि से सेवानिवृत्त हैं। दो निजी विवि में नियुक्त हैं। जबकि शेष 3 निजी स्कूलों में शिक्षक हैं। सत्र 2016-17 के लिए इनमें से 4 शिक्षकों को प्रतिदिन 3 कालांश के हिसाब से एक साल में 3.53 लाख रुपए का भुगतान गेस्ट फैकल्टी के तौर पर किया गया। जबकि स्कूली शिक्षकों के पास विवि की कक्षाएं लेने के लिए पर्याप्त योग्यता ही नहीं है। आरटीआइ में मिली जानकारी के अनुसार इन शिक्षकों में से एक पीएचडी हैं, दो केवल एमए डिग्रीधारी हैं। ये शिक्षक किसी कॉलेज या विवि में नियमित पे-स्केल पर नहीं पढ़ा रहे हैं। संभवत: इनके पास नेट या स्लेट की योग्यता भी नहीं है।
स्कूल के शिक्षक रखना गलत: राज्य सरकार के नियमानुसार विवि व कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के तौर पर यूजीसी के निर्धारित योग्यताधारी सेवानिवृत्त शिक्षक (जिनकी आयु 70 वर्ष से अधिक न हो) को रखा जा सकता है। इसके अलावा किसी अन्य विवि या कॉलेज में नियमित शिक्षक को ही गेस्ट फैकल्टी रखा जा सकता है। नेट-स्लेट योग्यताधारी गैर सेवारत व नए अभ्यर्थी को किसी भी स्थिति में गेस्ट फैकल्टी नहीं रख सकते। विवि व कॉलेज के शिक्षक ही गेस्ट फैकल्टी के रूप में पढ़ा सकते हैं।
-विवि ने केवल निर्धारित योग्यताधारी शिक्षकों को ही अध्यापन की अनुमति दी है। भूपेन्द्रसिंह शेखावत, जनसम्पर्क अधिकारी, राजस्थान विवि
Published on:
28 Aug 2018 01:09 pm
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