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बारिश में सड़कें जलमग्न, स्कूल के बच्चे परेशान

स्थिति को देखते हुए कई अभिभावक अगले कुछ दिनों तक बच्चों को स्कूल school children नहीं भेजना चाहते हैं। कुछ का कहना है कि स्कूलों को विशेषकर कर प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए आधे दिन के बाद छुट्टी घोषित होनी चाहिए। ज्यादातर अभिभावक बारिश का दौड़ थमने तक ऑनलाइन कक्षाओं online classes की वकालत कर रहे हैं।

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-घंटों स्कूल और जाम में फंसे रहने पर मजबूर

-अभिभावकों ने की आधे दिन की छुट्टी या ऑनलाइन कक्षाओं की मांग

बेंगलूरु. कई स्कूलों के मैदानों और बाहर सडक़ पर पानी rain water भर जाने के कारण विद्यार्थियों, शिक्षकों व अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छुट्टी के बाद जलजमाव water logging के कारण बच्चे घंटों या तो स्कूल या फिर जाम में फंसे रहने पर मजबूर हैं।

स्थिति को देखते हुए कई अभिभावक अगले कुछ दिनों तक बच्चों को स्कूल school children नहीं भेजना चाहते हैं। कुछ का कहना है कि स्कूलों को विशेषकर कर प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए आधे दिन के बाद छुट्टी घोषित होनी चाहिए। ज्यादातर अभिभावक बारिश का दौड़ थमने तक ऑनलाइन कक्षाओं online classes की वकालत कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि अपने बच्चों को लेकर वे किसी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहते हैं। स्कूलों के पास ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने की तमाम सुविधाएं हैं। ऐसे में उन्हें भी बच्चों के हित में सुरक्षात्मक कदम उठाने चाहिए।

बच्चे गेट पर खड़े होकर इंतजार करते रहे

यशवंतपुर स्थित के एक निजी स्कूल के बच्चे मंगलवार को कक्षाएं समाप्त होने के तीन से चार घंटे के बाद घर पहुंचे। स्कूल के बाहर सड़क पूरी तरह पानी से लबालब थी। बच्चे गेट पर खड़े होकर अपने माता-पिता का इंतजार करते नजर आए। स्कूल बसों में सफर करने वाले बच्चे भी घंटों तक बसों के अंदर फंसे रहे। सभी मुख्य सड़कों का पानी स्कूल school की सडक़ों पर आ गया। बस चालकों ने बताया कि स्कूल बसों को पानी से लबालब सडक़ से निकालना पड़ा। ऐसे में हादसे का जोखिम भी रहता है। बस का इंजन बीच में बंद होने का खतरा भी रहता है।

यह तो सिर्फ एक रूट और स्कूल का हाल

एम. एस. रामय्या की निवासी शोभा ने बताया कि घर से उनके बेटे की स्कूल की दूरी करीब पांच किलोमीटर है। उनका बेटा तीसरी कक्षा में है। आमतौर पर स्कूल बस school bus दोपहर 3 बजे निकलती है और 3.30 बजे तक उनका बेटा घर वापस आ जाता है। लेकिन, मंगलवार को बस शाम 5.30 बजे घर पहुंची।शोभा ने कहा कि बस में सवार अन्य बच्चों को घर पहुंचने में 30 से 50 मिनट का समय और लगा होगा। यह तो सिर्फ एक रूट और एक स्कूल का हाल है। ऐसी कई और स्कूल बसें हैं जो कई किलोमीटर का सफर तय करती हैं।

ईमेल भेजने की सलाह

एक अन्य अभिभावक रिया खन्ना ने बताया कि उन्होंने स्कूल को फोन करके कुछ दिनों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं लगाने का अनुरोध किया। हालांकि, फोन उठाने वाले कर्मचारी ने उन्हें स्कूल प्रिंसिपल को ईमेल भेजने की सलाह दी।