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RTU Mercy Chance Rules आरटीयू में कायम 'रहम' का रिकॉर्ड, पहले ही दिए जा चुके हैं दो मर्सी चांस, तीसरे के लिए बोम का डिसीजन
RTU Mercy Chance Rules इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर जो प्रश्नचिन्ह लगाए जा रहे हैं, उसमें एक बड़ी भूमिका हमारे विश्वविद्यालय भी अदा कर रहे हैं। कुछ एेसा ही हाल हो रहा है राजस्थान टेक्नीकल यूनिवर्सिटी (आरटीयू) में। आरटीयू 'रहम' के मामले में एक रिकॉर्ड कायम करती जा रही है। आरटीयू ने इंजीनियरिंग बीटेक बैच 2006 से 2008 के स्टूडेंट्स को एक और 'मर्सी चांस' देने का फैसला लिया है। खास बात यह है कि ये स्टूडेंट्स 12 साल में भी इंजीनियरिंग पूरी नहीं कर पाए हैं। स्टूडेंट्स को पहले ही दो मर्सी चांस दिए जा चुके हैं, लेकिन वे इनमें भी सफलता पाने में नाकाम रहे। अब आरटीयू के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बोम) ने एेसे स्टूडेंट्स से सहानुभूति रखते हुए उन्हें मर्सी चांस देने का निर्णय लिया है।
अन्य कोर्स वालों को भी मिलेगा चांस RTU Give chance to complete degree Under Mercy Chance Rules
सिर्फ बीटेक ही नहीं विवि ने बीटेक लीप 2007 से 2009 बैच, बीएचएमसीटी 2006 से 2008, एमसीए 2006 से 2010 और एमबीए 2006 से 2012 बैच के स्टूडेंट्स को भी मर्सी चांस देने का फैसला लिया गया है। परीक्षा नियंत्रक प्रो.ए.के.द्विवेदी का कहना है कि एग्जाम अगस्त के सेकंड वीक से शुरू होंगे। बीटेक में एेसे लगभग 700 से 800 स्टूडेंट्स हैं।
डिग्र्री पूरी करने के मिलते हैं आठ साल Time Limit for complete Degree in RTU
यूनिवर्सिटी के नियमानुसार बीटेक डिग्री पूरी करने के लिए स्टूडेंट्स को अधिकतम आठ साल दिए जाते हैं, लेकिन एेसे स्टूडेंट्स जो आठ साल में भी डिग्री पूरी नहीं कर पाए, उन्हें यूनिवर्सिटी पिछले कुछ समय से मर्सी चांस दिए जा रही है। वहीं एमबीए के लिए अधिकतम चार साल निर्धारित हैं। आरटीयू के पूर्व वाइस चांसलर प्रो. आर.पी. यादव का कहना है कि हर कोर्स के लिए समय सीमा तय कर दी गई थी, फिर तीसरे चांस का लॉजिक नहीं है। सवाल तो यह होना चाहिए कि स्टूडेंट्स 12 साल में भी डिग्री पूरा क्यों नहीं कर पा रहे हैं। यूनिवर्सिटी अपने लेवल पर एेसे स्टूडेंट्स को मदद करने करने की पहल करे, यह जरूरी है।
बोम स्ट्रक्चर RTU Bom Structure
बोम में आरटीयू के दो डीन, दो प्रोफेसर, दो इलेक्टिव टीचर, एक स्पेशल इनवाइटी, एक राज्यपाल नॉमिनी, दो एमएलए, एक सरकारी कॉलेज और एक प्राइवेट कॉलेज के प्रतिनिधि जैसे लोग शामिल होते हैं। वीसी बोम के चेयरमैन और रजिस्ट्रार मेंबर सेक्रेटरी होते हैंं।
आरटीयू के वीसी प्रो.एन.पी.कौशिक ने बताया की स्टूडेंट्स लगातार गुहार लगा रहे थे। कई स्टूडेंट्स एेसे भी हैं जिनकी एक-दो सब्जेक्ट के कारण डिग्री रुकी है। एेसे स्टूडेंट्स के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए यह फैसला लिया गया है।
Published on:
11 May 2018 08:33 am
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