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रेयान स्कूल एक बार फिर गलत वजहों से खबर में

गुरुग्राम स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल (Ryan International School) दो साल बाद फिर गलत वजहों से खबर में आया है। इस स्कूल में सातवीं कक्षा में पढऩे वाले दो छात्रों की गुरुवार को स्कूल परिसर में झगड़ा हो गया।

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Ryan International School

Ryan International School

गुरुग्राम स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल (Ryan International School) दो साल बाद फिर गलत वजहों से खबर में आया है। इस स्कूल में सातवीं कक्षा में पढऩे वाले दो छात्रों की गुरुवार को स्कूल परिसर में झगड़ा हो गया। झगड़े ने हिंसक रूप ले लिया। बच्चों ऐसे व्यवहार के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को जानने वालों ने इस पर चिंता जाहिर की है। हालांकि सिक्योरिटी स्टाफ ने दोनों को अलग-अलग कर दिया। इसके बाद प्रिंसिपल ने उन्हें सख्त चेतावनी दी।

प्रिंसिपल ने उनके माता-पिता को भी बुलाकर उन्हें बताया कि अगर ऐसी घटना दोबारा होगी तो उन्हें स्कूल से निकाल दिया जाएगा। हालांकि दोनों में से किसी छात्र के माता-पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करवाई है, लेकिन स्कूल परिसर में छात्रों के बीच मारपीट चिंता का विषय है, क्योंकि स्कूल का अतीत अच्छा नहीं रहा है। इससे पहले, 8 सितंबर, 2017 को भोंडसी स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल के शौचालय में दूसरी कक्षा में पढऩे वाले सात वर्षीय एक छात्र की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। इस अपराध में स्कूल में ही पढऩे वाला ग्यारहवीं कक्षा का एक छात्र आरोपी है।

आरोपी ने कथित तौर पर पैरेंट-टीचर मीटिंग को रोकने के लिए नृशंस अपराध को अंजाम दिया था। इससे भी पहले, 9 मई, 2016 को गुरुग्राम के सेक्टर 40 स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल की तीसरी कक्षा की छात्रा जिया जुनेजा की मौत स्कूल बस के ड्राइवर की असावधानी के कारण हो गई थी। वसंत कुंज स्थित इसी स्कूल की पहली कक्षा का एक छात्र 31 जनवरी, 2016 को पानी के टैंक में डूब गया था।

गुरुग्राम स्थित कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट श्वेता शर्मा ने कहा, किशोरों में आवेग के रूप में गुस्सा ज्यादा रहता है। यह ऐसी उम्र है जब बच्चे बहुत कुछ जानने लगते हैं लेकिन उनको यह नहीं मालूम होता है क्या करना चाहिए। शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तन काफी होता है जिसे वह संभाल नहीं पाते हैं। शर्मा ने कहा, हालांकि अब माता-पिता अक्सर बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करते हैं, लेकिन उनके पास बच्चों के लिए बमुश्किल से समय होता है। हमें इन बच्चों के लिए एक सपोर्ट सिस्टम बनाने की जरूरत है।