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सरकारी कॉलेज के बधिर बच्चों की पढ़ाई को लेकर राज्य सरकार का रवैया भले ही बेफिक्र जैसा रहे, शिक्षकों ने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इन बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा उठाया है। सामान्य शिक्षकों ने साइन भाषा का प्रशिक्षण लेने व इसके बाद बच्चों को पढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए कॉलेज ने इंदौर की एक संस्था के साथ ट्राइ-अप किया है। संस्था के प्रशिक्षक, यहां कॉलेज के शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण अगले माह से ही शुरू हो जाएगा। अभी सामान्य शिक्षक अनुवादकों के जरिए क्लास ले रहे हैं।
क्लास से पहले लेंगे प्रशिक्षण
शिक्षक, सुबह नौ बजे कक्षा शुरू होने से पहले व शाम 4 बजे बाद कॉलेज परिसर में ही प्रशिक्षण लेंगे। प्रशिक्षक साइन भाषा के साथ ही बधिर बच्चों से बात करने का तरीका भी शिक्षकों को समझाएंगे। यह प्रशिक्षण ३ महीने चलेगा।
करीब 290 बच्चे कर रहे पढ़ाई
गौरतलब है कि कॉलेज में चार वर्ष पहले बधिर बच्चों के लिए अलग सेक्शन शुरू किया गया था। इस सत्र में करीब 290 बच्चे पढ़ रहे हैं। नए सत्र के लिए भी करीब 350 बच्चों ने आवेदन किया है। स्कूल में बधिर बच्चों के लिए दो कमरें अलग से निर्धारित हैं। फिलहाल इन बच्चों को राजनीतिक विज्ञान, लोक प्रशासन, ड्रॉइंग एंड पेंटिंग, हिंदी, अंग्रेजी पर्यावरण और कंप्यूटर विषय ही पढ़ाया जा रहा है। कॉमर्स व विज्ञान में प्रवेश नहीं है।
बधिर बच्चों के लिए देंगे प्रशिक्षण
जयपुर के कॉलेज से प्रस्ताव प्राप्त हुआ था। अगस्त के बाद प्रशिक्षक भेंजेंगे। हम बधिर प्रशिक्षकों को ही भेजेंगे। बधिर प्रशिक्षक ही अच्छी तरह से सीखा सकते हैं। सेंटर आरसीआई से संबद्धता प्राप्त है। पिछले 18 वर्षों से साइन भाषा सीखा रहे हैं।
मोनिका पंजाबी, निदेशक, इंदौर डेफ बाइ-लिंगविल एकेडमी
बधिर बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों को तीन महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए आयुक्तालय से 75 हजार रुपए का फंड भी मिल चुका है। अगस्त माह से ट्रेनिंग शुरू हो जाएगी।
कीर्ति शेखावत, प्राचार्या, सरकारी कॉलेज
Published on:
19 Jul 2018 10:46 am
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