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कॉलेज को बचाना है तो विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाएं : कुलपति

बिहार में दरभंगा के संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सर्वनारायण झा ने कॉलेजों एवं स्नातकोत्तर विभागों में छात्रों की वर्तमान उपस्थिति पर घोर चिंता व्यक्त करते हुए शनिवार को कहा कि हर हाल में छात्रों की संख्या बढ़ानी होगी अन्यथा कॉलेज ही नहीं बच पाएंगे।

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Darbhanga Sanskrit University

Darbhanga Sanskrit University

बिहार में दरभंगा के संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सर्वनारायण झा ने कॉलेजों एवं स्नातकोत्तर विभागों में छात्रों की वर्तमान उपस्थिति पर घोर चिंता व्यक्त करते हुए शनिवार को कहा कि हर हाल में छात्रों की संख्या बढ़ानी होगी अन्यथा कॉलेज ही नहीं बच पाएंगे। झा ने विद्वत परिषद् की बैठक में कहा कि हर हाल में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ानी होगी अन्यथा कॉलेज ही नहीं बच पाएंगे। उन्होंने पुरानी व्यव्यस्था को तब की बात कहते हुए हर हाल में आज के संदर्भ में छत्र-छात्राओं की संख्या बल बढ़ाने पर जोर दिया। इसके समर्थन में कुलपति ने तर्क दिए कि कॉलेजों एवं विभागों में नामांकन की अधिकतम छात्र संख्या बढ़ाकर भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज की जा सकती है।

कुलपति ने कहा कि स्नातकोत्तर से लेकर उपशास्त्री तक की कक्षाओं में अब पहले से अधिक छात्र-छात्राओं का नामांकन होगा। प्रधानाचार्यों और विभागाध्यक्षों को यह अधिकार दिया गया है कि विशेष परिस्थिति में छात्र-छात्राओं की तय नामांकन संख्या से भी अधिक बच्चों का वे दाखिला ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें कुलपति से लिखित स्वीकृति लेनी होगी। फिलहाल सामूहिक निर्णय हुआ कि स्नातकोत्तर में प्रति वर्ष साहित्य में 150, व्याकरण में 100, ज्योतिष में 40-40, दर्शन, वेद, धर्मशास्त्र एवं कर्मकांड में 50-50 छात्रों का अब नामांकन हो पाएगा।

प्रो. झा ने कहा कि इसी तरह जिन कॉलेजों में आचार्य की पढ़ाई हो रही है वहां भी साहित्य में 120, व्याकरण में 100, ज्योतिष में 40-40, वेद, दर्शन और धर्मशास्त्र में 50-50 छात्रों का नामांकन होगा। वहीं, उपशास्त्री कॉलेजों में भी अब 60 से बढ़ाकर हर एक साल 100 छात्रों का नामांकन करना होगा। शास्त्री स्तर के महाविद्यालयों में साहित्य, व्याकरण एवं ज्योतिष में छात्रों की संख्या पूर्ववत रखते हुए वेद, दर्शन, धर्मशास्त्र विषयों में 20-20 छात्रों के नामांकन का निर्णय लिया गया।

बैठक में कॉलेज निरीक्षक डॉ. दिनेश्वर यादव के सुझाव पर तय हुआ कि अब नामांकन एवं परीक्षा प्रपत्रों के स्वरूप में बदलाव किया जाएगा। नए फॉर्म में छात्रों का मोबाईल नम्बर, आधार संख्या और बैंक खातों की विस्तृत जानकारी रहेगी ताकि छात्रों को सभी सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सके। कुलपति ने प्रपत्रों में बदलाव के लिए एक कमेटी बनाने का सुझाव भी दिया। बैठक में एक अन्य अहम निर्णय के तहत बैचलर इन लाइब्रेरी साइंस एवं डिप्लोमा इन लाइब्रेरी साइंस की सेमेस्टर प्रणाली पर बने पाठ्यक्रमों को विद्वत परिषद् ने हरी झंडी दे दी। इसके पाठ्यक्रम स्वीकृति के लिए पहले ही राजभवन भेजा जा चुका है। वहां से सहमति मिलते ही इसकी पढ़ाई संस्कृत विश्वविद्यालय में भी शुरू हो जाएगी।