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अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी ने पेश की स्वस्थ लोकतंत्र की मिसाल, कमलापति और राजनारायण की यादें कर दीं ताजा…

UP Assembly Election 2022 अपने सबाब पर पहुंच चुका है। आरोप-प्रत्यारोप की झड़ी लग रही है। हर नेता, हर पार्टी एक दूसरे को पटकनी देने का कोई दांव हाथ से नहीं जाने दे रहे। ऐसे में दो परस्पर विरोधी दलों के नेताओं का काफिला आमने-सामने हो और दोनों नेता अपने-अपने मंच से हंसते हुए एक दूसरे का अभिवादन कर आगे बढ़ जाएं, ये भारतीय लोकतंत्र के स्वस्थ होने का परिचायक ही तो है।

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अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी का काफिला आमने-सामने

अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी का काफिला आमने-सामने

वाराणसी. UP Assembly Elections 2022 अपने चरम पर है। राजनीतिक दलों के नेता एक दूसरे पर जमकर हमला बोल रहे हैं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष कोई किसी को बक्शने के मूड में तनिक भी नहीं है। इसी बीच एक तस्वीर सोशल मीडिया पर आती है और पलक झपकते ही वायरल हो जाती है। दरअसल ये तस्वीर भारतीय लोकतंत्र की मजबूती की ओर इशारा करती है। ये तस्वीर बताती है कि दुनिया में सबसे बड़े भारतीय लोकतंत्र को क्यों इतना महत्व दिया जाता है। ये तस्वीर उस सुनहरे अतीत की याद दिलाती है जब दो परस्पर विरोधी दल और प्रत्याशी जब रैली व प्रचार के दौरान आमने-सामने होते रहे तो कैसे मिला करते थे। ये तस्वीर है सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस महासचिव व यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी की चुनावी रैली की।

ये तस्वीर है बुलंदशहर के जहांगीराबाद इलाक़े के अनूपशहर बस स्टैंड के पास की है। वहां प्रचार के दौरान प्रियंका गांधी और अखिलेश व जयंत का चुनावी प्रचार वाहन आमने-सामने हो गए। ऐसे में दोनों ही सामान्य शिष्टाचार को नहीं भूले और एक दूसरे का अभिवादन किया और आगे बढ़ गए।

इस तस्वीर को अखिलेश यादव ने अपने ट्विटर हैंडिल पर शेयर किया जिसका कैप्शन दिया, "एक दुआ सलाम-तहजीब के नाम।" वहीं प्रियंका ने वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन दिया,"हमारी भी आपको राम राम।"

दरअसल ये तस्वीरें भारतीय लोकतंत्र के सुनहरे अतीत की याद दिलाती हैं, जब प्रत्याशी हो या धुर विरोधी नेता, प्रचार के दौरान जब आमना-सामना होता था तो वो सामान्य शिष्टाचार कभी नहीं भूलते थे। गंगाजमुनी तहजीब वाला बनारस भी इसका गवाह रहा है। वो वक्त रहा 1980 का जब देश के दो दिग्गज नेता पंडित कमलापति त्रिपाठी (कांग्रेस) और लोकबंधु राजनारायण एक दूसरे के खिलाफ वाराणसी संसदीय सीट से आमने-सामने थे। एक दिन जब दोनों प्रचार करते रोहनिया क्षेत्र में पहुंचे तो दोनों का काफिला आमने-सामने आया। ऐसे में राजनारायण अपने वाहन से उतरे और पंडित जी को प्रणाम कर न केवल आशीर्वाद लिया बल्कि अपने और अपनी टीम के नाश्ते और वाहनों में पेट्रोल-डीजल भरवाने का पैसा भी मांग लिया। पडिंत जी ने उन्हें निराश भी नहीं किया और अपने निजी सचिव से लोकबंधु की मांग तत्काल पूरी कराई थी।

अब यूपी विधानसभा चुनाव में प्रियंका और अखिलेश का काफिला जब आमने-सामने आया तो उन दिनों की याद ताजा हो आई। दोनों ने एक दूसरे का हंसते हुए अभिवादन किया और अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ गए। यहां बता दें कि ये 2017 का विधानसभा चुनाव नहीं है जिसमें अखिलेश यादव और राहुल गांधी एक साथ थे। बल्कि इस बार समाजवादी पार्टी अपने महागठबंधन के साथ चुनाव मैदान में है तो कांग्रेस एकला चलो की राह पर। ऐसे में दोनों ही नेता अखिलेश व प्रियंका एक दूसरे की नीतियों पर भले हमला कर रहे हों पर व्यक्तिगत आक्षेप अभी तक नहीं सुने गए।