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UP Assembly Elections 2022: … तो ज्ञानपुर से बाहुबली विजय मिश्र निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ठोकेंगे ताल

UP Assembly Elections 2022 अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। एक चरण का मतदान हो चुका है। दूसरे चरण के मतदान में महज चंद दिन रह गए हैं। इस बीच पूर्वांचल की सियासत गर्माने लगी है। एक तरफ जहां एमपी-एमएलए कोर्ट ने बांदा जेल में बंद बाहुबली मोख्ता अंसारी को चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी है, तो दूसरी ओर आगरा जेल में बंद भदोही के ज्ञानपुर विधानसभा सीट से बाहुबली विजय मिश्र के भी चुनाव लड़ने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।  

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बाहुबली विजय मिश्र

बाहुबली विजय मिश्र

वाराणसी. UP Assembly Elections 2022 में बाहुबली नेताओं के चुनाव लड़ने को लेकर काफी समय तक असमंजस की स्थिति बनी रही। इस बीच दो दिन पहले एमएपी-एमएलए कोर्ट ने बांदा जेल में बंद मोख्तार अंसारी के चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी तो उनके भी मऊ से ताल ठोकने का रास्ता खुल गया। इसके बाद ज्ञानपुर के बाहुबली विधायक विजय मिश्र के चुनाव लड़ने पर बना संशय भी अब खत्म होता नजर आ रहा है। दरअसल ज्ञानपुर के बाहुबली विधायक विजय के प्रतिनिधि के उनके नाम पर चार सेट में नामांकन पत्र खरीदे जाने के बाद से उम्मीद बढ़ गई है कि विजय मिश्र इस बार के चुनाव में भी ताल ठोकते नजर आएंगे।

बता दें कि यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के निशाने पर आए बाहुबली नेताओं में विजय मिश्र भी एक है। ये फिलहाल आगरा जेल में बंद हैं। यहां ये भी बता दें कि विजय मिश्र भदोही के ज्ञानपुर विधासभा क्षेत्र से चार बार विधायक रह चुके हैं। कहा जाता है कि पूर्वांचल के दिग्गज कांग्रेसी नेता पंडित कमलापति त्रिपाठी के कहने पर विजय मिश्र राजनीति में आए और पहली बार 1990 में ब्‍लॉक प्रमुख बने। इसके बाद वो भदोही के ज्ञानपुर विधानसभा सीट से 2002, 2007 और 2012 में विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के टिकट से जीते थे। 2017 में विजय मिश्रा पर 50 से ज्‍यादा आपराधिक मामले दर्ज थे। बावजूद इसके वो इस बार निषाद पार्टी से चुनाव लड़े और मोदी लहर में भी उन्‍होंने 20 हजार से ज्‍यादा वोटों से जीत दर्ज की।

विजय मिश्र जिन्होंने पंडित कमलापति के शिष्य बन कर शुरू की राजनीति
विजय मिश्र के बारे में कहा जाता है कि पूर्वांचल के दिग्गज राजनेता रहे पंडित कमलापति त्रिपाठी ने उन्हें चुनावी राजनीति में उतरने का सुझाव दिया। कालांतर में उन्होंने सपा संरक्षक मुलायम सिंह से भी मधुर संबंध बना लिया। ऐसे में पहले भदोही से कांग्रेस के टिकट पर ब्लॉक प्रमुख के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया। फिर सपा के टिकट पर तीन बार विधायक बने। लेकिन अखिलेश यादव ने 2017 के चुनाव से पहले ही विजय को बाहुबली मानते हुए उनका टिकट काट दिया। ऐसे में वो निषाद पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और मोदी लहर में भी चुनाव जीते।

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