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Rajasthan Election: भजनलाल ने कोलायत को बना लिया था मूंछ का सवाल

Rajasthan Assembly Election: यूं तो किसी भी चुनाव में हर सीट जीतने के लिए राजनीतिक दल और प्रत्याशी पूरा जोर लगाते हैं, लेकिन कभी-कभी किसी सीट पर संघर्ष कुछ ज्यादा ही रोचक हो जाता है।

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जयपुर

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Nupur Sharma

Oct 26, 2023

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अनंत मिश्रा


Rajasthan Assembly Election : यूं तो किसी भी चुनाव में हर सीट जीतने के लिए राजनीतिक दल और प्रत्याशी पूरा जोर लगाते हैं, लेकिन कभी-कभी किसी सीट पर संघर्ष कुछ ज्यादा ही रोचक हो जाता है। तीन दशक पहले बीकानेर जिले की कोलायत सीट भी पूरे देश में खासी चर्चा का केन्द्र बन कर उभरी थी। बात है 1993 के विधानसभा चुनाव की। इस सीट पर लगातार तीन बार से देवी सिंह भाटी जीत रहे थे। कांग्रेस बीस साल से यहां जीतने के लिए तरस रही थी।

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राजपूतों के बाद विश्नोई जाति के मतदाता बड़ी संख्या में यहां हैं। कांग्रेस ने सीट निकालने के लिए यहां हुकमाराम विश्नोई को मैदान में उतारा। विश्नोई हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल के नजदीकी माने जाते थे। लगातार चार बार से हार रही सीट को निकालने की जिम्मेदारी भजनलाल ने स्वयं उठाई। हुकमाराम के सामने देवी सिंह भाटी लगातार चौथी बार जीत के लिए मैदान में थे। भाटी जनता दल छोड़कर इस बार भाजपा से चुनाव लड़ रहे थे।

प्रचार शुरू होते ही हरियाणा से आए पांच मंत्रियों और 15 विधायकों ने बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ बीकानेर में डेरा डाल दिया था। दोनों तरफ से आक्रामक प्रचार अभियान चल रहा था। बीच-बीच में छिटपुट झड़पों के समाचार भी आने लगे। मतदान से तीन दिन पहले तक माहौल तनावपूर्ण हो चला था, भजनलाल किसी भी कीमत पर ये सीट कांग्रेस की झोली में डालना चाहते थे।

भजनलाल ने दो-तीन बार कोलायत क्षेत्र का दौरा किया। मतदान वाले दिन सुबह से ही मतदान केन्द्रों के बाहर दोनों प्रत्याशियों के समर्थकों में झड़पें होने लगीं। प्रचार खत्म होने के बावजूद हरियाणा के अनेक विधायक एवं कार्यकर्ता कोलायत क्षेत्र में डटे रहे। मतदान के दिन दोपहर एक बजे भाटी के काफिले पर कांग्रेस कार्यालय के अंदर से पहले पत्थर फेंकने और फिर फायरिंग की खबर आई। थोड़ी देर में खबर आग की तरह फैल गई।

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कांग्रेस कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में भाटी के समर्थक जमा हो गए। दोनों तरफ से पथराव शुरू हो गया। भीड़ पुलिस के काबू में नहीं आ रही थी। मतदान खत्म होने तक पूरे विधानसभा क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण रहा। नतीेजे आए तो 20 हजार से अधिक वोट से जीतकर भाटी चौथी बार विधानसभा पहुंचने में सफल रहे। यानी भजनलाल हर संभव प्रयासों के बावजूद देवीसिंह भाटी को रोक नहीं पाए।