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up assembly election 2022: पूर्वांचल के देवरिया की पथरदेवा सीट पर रोमांचक मुकाबले की उम्मीद

up assembly election 2022 में पूर्वाचल के देवरिया जिले की पथरदेवा सीट पर रोमांचक मुकाबला होने की पूरी उम्मीद है। इस सीट से बीजेपी ने जहां मंत्री सूर्य प्रताप शाही को मैदान में उतारा है वहीं, समाजवादी पार्टी ने पूर्व मंत्री ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी को जबकि बीएसपी ने हाल ही में सपा का दामन छोड़ कर पार्टी में शामिल हुए परवेज आलम को मैदान में उतारा है।

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up assembly election 2022

up assembly election 2022

वाराणसी. up assembly election 2022 में इस दफा पूर्वांचल के देवरिया जिले में रोमांचकारी मुकाबला देखने को मिल सकता है। वजह यहां जिन तीन प्रमुख पार्टियों ने जिन प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है उसमें से दो के बीच पूर्व में भी मुकाबला हो चुका है। इसमें बीजेपी प्रत्याशी सूर्य प्रताप शाही हैं तो समाजवादी पार्टी से ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी। वहीं एक बीएसपी भी इस मुकाबले को और रोचक बना रही है। वजह बीएसपी ने जिसे टिकट दिया है उनके पिता सपा के टिकट पर पूर्व में अपनी ताकत का बखूबी परिचय दे चुके हैं। बता दें कि बीएसपी ने इस बार पथरदेवा से शाकिर अली के बेटे परवेज को मैदान में उतारा है।

यहां बता दें कि पथरदेवा विधानसभा सीट 2012 में हुए परिसीमन के बाद वजूद में आई है। इससे पहले इसे कसया सीट के रूप में जाना जाता रहा। कसया से सूर्य प्रताप शाही और ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी 1985 से एक दूसरे को चुनावी चुनौती देते आ रहे हैं। सबसे पहले 1985 में कसया सीट से शाही ने निर्दलीय चुनाव लड़ रहे त्रिपाठी को महज 559 वोटों से पराजित किया था। लेकिन त्रिपाठी ने 1989 में इस हार का बदला चुका लिया जब उन्होने बतौर जनता दल प्रत्याशी भाजपा के शाही को हराया था और पहली बार विधायक बने।

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इसके बाद बदले राजनीतिक समीकरण में 1991 में हुए मध्यावधि चुनाव में राम लहर के बीच सूर्य प्रताप शाही ने त्रिपाठी को पराजित कर यह सीट फिर से बीजेपी की झोली में डाल कर अपनी पुरानी हार का हिसाब चुक्ता किया था। लेकिन 1993 में त्रिपाठी ने शाही को फिर पटकनी दी। उसके बाद 1996 के चुनाव में त्रिपाठी ने जनता दल को छोड़ समाजवादी पार्टी का दामन थामा और 2002 व 2007 में शाही को लगातार पराजित किया।

2012 में हुए परिसीमन के बाद हुए पहले चुनाव में त्रिपाठी, कुशीनगर विधानसभा सीट और शाही नवसृजित पथरदेवा सीट से चुनावी समर में उतरे। इस बार सपा के शाकिर अली ने शाही को पराजित किया। लेकिन शाही ने 2017 में शाकिर अली को पराजित कर हिसाब बराबर कर लिया। इस बीच शाकिर अली के इंतकाल के बाद अब 2022 में उनके बेटे परवेज आलम सपा की बजाय बीएसपी के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। यहां ये भी बता दें कि पतरदेवा विधानसभा क्षेत्र मे मुस्लिम मतदाताओं की तादाद अच्छी खासी है। ऐसे में बीएसपी प्रत्यासी शाकिर अली के बेटे परवेज आलम इस लड़ाई को त्रिकोणीय संघर्ष में तब्दील कर सकते हैं।