
कौन हैं नगालैंड के यूजी जिन्हें टैक्स नहीं दिया तो जान सांसत में, पीएम मोदी ने भी दी कार्रवाई की चेतावनी
दीमापुर से परितोष दुबे
नगालैंड के चुनावी शोर में अवैध वसूली का मामला किसी भी राजनीतिक दल के एजेंडे में नहीं है।जबकि राज्य के छोटे- बड़े व्यवसायी, सरकारी कर्मचारी सबको यूजी का टैक्स चुकाना ही पड़ता है।
दीमापुर हो या कोहिमा, मोन हो या घासपानी नगालैंड में कहीं भी व्यापार करने के लिए एक नहीं दो नहीं 14-17 यूजी या पार्टियों को रंगदारी देनी पड़ती है। कौन हैं ये यूजी या पार्टियां कौन हैं इसके प्रधान जिनपर कार्रवाई का वायदा पीएम नरेन्द्र मोदी को भी नगालैंड आकर करना पड़ता है। दरअसल नगा समूहों का एक हिस्सा अभी भी भूमिगत होकर अपनी गतिविधियां संचालित करता है। जिसे नगालैंड में अंडरग्राउंड या यूजी कहा जाता है। इन संगठनों का निर्माण विद्रोही गतिविधियां संचालित करने के लिए दशकों पूर्व किया गया था। सीज फायर होने के बाद इनमें से ज्यादातर ने अपने हथियार जमा करा दिए हैं या उनका सार्वजनिक प्रदर्शन करने से परहेज करते हैं लेकिन धन उगाही आज भी जारी है। दीमापुर के एक व्यवसायी के मुताबिक उगाही से मिली राशि का खून यूजी के मुंह में लग गया हैा पुलिस प्रशासन राजनीतिक दलों का स्थानीय नेतृत्व आंखे मूंदे रहता है व्यापारियों के पास शांति से व्यवसाय करने के लिए यूजी जिसे टैक्स कहते हैं देना ही पड़ता है।
अघोषित जीएसटी है वसूली
कोहिमा के व्यवासायी बताते हैं कि प्रमुख सडक़ों और व्यवसायिक केन्द्रों के आसपास यूजी के कैडर व धन उगाही करने वालों को पूरा नेटवर्क सक्रिय है। आप इनकी जानकारी और मु_ी गर्म किए बिना एक ट्रक सामान भी नहीं मंगा सकते। गोदामों से लेकर थोक मंडी तक इनका नेटवर्क पल पल की जानकारी अपने सरगना को पहुंचाते हैं। रंगदारी यहां का अघोषित जीएसटी है जिसके जाल से बचा नहीं जा सकता।
छोटी सी रेहड़ी साल का बीस हजार
दीमापुर रेलवे स्टेशन के पास चाय, नाश्ते की छोटी सी रेहड़ी लगाने वाले दुकानदार बताते हैं इन पार्टियों के पास आपके गल्ले की जानकारी भी होती है कौन कितने का व्यवसाय कर रहा है उस आधार पर अघोषित टैक्स की गणना की जाती है। फिर बाजार कमेटी का पदाधिकारी सभी दुकानदारों से पैसे इक_ा कर सालाना भुगतान करता है तब शांति से व्यवसाय कर पाते हैं।
दो से चार हुए अब तो 17 पहुंच गई संख्या
घासपानी के व्यवसायी बताते हैं कि कुछ साल पहले तक इन संगठनों की संख्या चार से छह के बीच में थीं इन दिनों अब 17 संगठन उगाही में लगे हुए हैं।
सरकारी कर्मियों से 12 से 24 टका की वसूली
भूमिगत संगठनों के नाम पर सिर्फ व्यवसायियों से ही पैसा नहीं वसूला जाता बल्कि नगालैंड सरकार के कर्मियों से भी वसूली की जाती है। नाम न छापने की शर्त पर एक सरकारी कर्मचारी ने बताया कि सरकारी कर्मियों से उनकी सेलरी के 12 से 14 प्रतिशत तक की उगाही की जाती है। वर्ष 2017 में एनआइए ने राज्य सरकार के चार अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया था। लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में जाता दिखा। अभी भी सरकारी कर्मचारियों से वसूली जारी है।
क्या कहा था प्रधानमंत्री ने
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने नगालैंड दौरे में भरी जनसभा में कहा कि राज्य में एनडीए सरकार के आने के बाद अवैध वसूली में लगे तत्वों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
26 Feb 2023 10:11 pm
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