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चार राज्य में 47 सीटों पर नोटा भारी

लोकतंत्र का उत्सवः इस बार घटी नोटा की हिस्सेदारी

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चार राज्य में 47 सीटों पर नोटा भारी

चार राज्य में 47 सीटों पर नोटा भारी

नई दिल्ली. लोकतंत्र के उत्सव में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) का विकल्प देने पर विवाद रहा है। हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों से पूर्व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बधेल ने नोटा के विकल्प को वोटिंग मशीन से हटाने का आग्रह किया था। उनका तर्क था कि मतदाता गलती से आखिरी बटन दबा सकते हैं, जिसमें नोटा का विकल्प दिया गया है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि चारों राज्य में करीब 47 ऐसी सीटें हैं, जिनमें हार-जीत के अंतर से ज्यादा वोट नोटा को पड़े हैं। इनमें 16 तो ऐसी सीटें हैं जहां नोटा में मिले वोटों के काफी कम मतों से हार-जीत का फैसला हुआ है।

हालांकि, यह भी एक तथ्य है कि कुल मिलाकर, नोटा वोटों की हिस्सेदारी 2018 के चुनावों में 1.41% से घटकर इस बार 0.97 फीसदी हो गई। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना में केवल एक सीट पर नोटा का वोट शेयर पांच फीसदी से अधिक रहा। 2018 में नोटा वोटों का सबसे बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ में था, जहां चार सीटों पर नोटा को 5 फीसदी से अधिक वोट मिले थे। राजस्थान में केवल एक सीट पर नोटा ने पांच फीसदी का आंकड़ा पार किया था।