स्वामी प्रसाद मौर्य का भाजपा से नाता तोड़ कर समाजवादी पार्टी का दामन थामना, भाजपा के गैर यादव मतों के ध्रुवीकरण को बड़ा झटका माना जा रहा है। वजह साफ है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक झटके में ही 45 कोइरी मतों, जिसमें सैनी, साक्य, कुशवाहा, कोली, मौर्य जैसी जातियों के गढ पूर्वांचल में भाजा की गणित गड़बड़ा दी है। विगत करीब तीन दशक से स्वामी प्रसाद ने खुद को कोइरी जाति के सर्वमान्य नेता के रूप में स्थापित किया है। यही वजह है कि कभी बसपा सुप्रीमो मायावती के बेहद करीबी माने जाते रहे। मायवती ने इन्हें सूबे की कमान थमा रखी थी। अब इनके सपा में शामिल होने से पूर्वांचल में भाजपा को बड़ा झटका लगा है। स्वमी प्रसाद पूर्वांचल की कई सीटों पर भाजपा की गणित गड़बड़ा दी है। इसे सहेज पाना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।