
मऊ. UP Assembly Election 2022- यूपी चुनाव से पहले पूर्वांचल राजनीतिक युद्ध का कुरुक्षेत्र बन चुका है। सत्तारूढ़ दल बीजेपी हो या फिर विपक्षी दल, सभी की नजर 22 जिलों की 126 विधानसभा सीटों पर है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्वी उत्तर प्रदेश को एक के बाद एक बड़ी सौगात दे रहे हैं। पूर्वांचल के जरिये ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी यूपी में पार्टी की वापसी कराने को बेकरार हैं। बुधवार 27 अक्टूबर को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के स्थापना दिवस पर समाजवादी पार्टी सहित नौ दलों का एक मंच पर जमावड़ा लगा। मऊ के हलधरपुर मैदान में भीड़ देखकर गदगद हुए अखिलेश यादव ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर ने ही भाजपा को सत्ता तक पहुंचाया था और अब वही बाहर करेंगे। इस दौरान ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादियों की लाल टोपी पहन रखी थी तो अखिलेश यादव भी पीला अंगौछा पहने नजर आए।
'खेला होबे' के बाद अब यूपी में 'खदेड़ा होबे': ओम प्रकाश राजभर
सपा से गठबंधन का ऐलान करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि वह प्रदेश के भावी मुख्यमंत्री को आपके सामने लेकर आए हैं। 2022 में अखिलेश यादव ही मुख्यमंत्री बनेंगे। सरकार बनी तो घरेलू बिजली का बिल 5 साल तक माफ किया जाएगा। पूर्व मंत्री ने कहा कि बंगाल के 'खेला होबे' के बाद अब यूपी में 'खदेड़ा होबे'।
राजनीतिक महायुद्ध का कुरुक्षेत्र साबित होगा हलधरपुर मैदान : अखिलेश यादव
मऊ की महापंचायत के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए कहा, गरीबों, दमितों, शोषितों, वंचितों, दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, मज़दूरों, किसानों, महिलाओं, युवाओं, शिक्षकों, कारोबारियों, नौकरीपेशा व पेशेवरों के अधिकारों की रक्षा के लिए झूठी व फरेबी भाजपा-सत्ता के खिलाफ 'मऊ का हलधरपुर मैदान एक राजनीतिक महायुद्ध का कुरुक्षेत्र साबित होगा।'
भाजपा के सामने तगड़ी चुनौती
पूर्वांचल की दो दर्जन से अधिक सीटों पर राजभर जाति का प्रभाव है। ओम प्रकाश राजभर के गठबंधन से बाहर जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कई राजभर नेताओं को फ्रंट पर लाकर बिरादरी को साधने की कोशिश की, लेकिन वह उतने कारगर नहीं साबित हो सके। अनिल राजभर को कैबिनेट मंत्री बनाकर प्रमोट किया गया। सकलदीप राजभर को राज्यसभा भेजकर राजभर बिरादरी पर पकड़ वह पहुंच बनाने का काम किया, लेकिन ओम प्रकाश राजभर और राम अचल राजभर जैसे दिग्गज नेता की सपा के साथ मौजूदगी ने भाजपा की मुश्किल बढ़ा दी है।
पूर्वांचल निकलता है लखनऊ का रास्ता
पूर्वांचल के 22 जिलों में 126 विधानसभा सीटें हैं जो सूबे की राजनीतिक दशा और दिशा तय करते हैं। इसीलिए कहा भी जाता है कि जिसने भी पूर्वांचल जीता, यूपी में सरकार भी उसकी बनी है। 2017 में भाजपा ने पूर्वांचल की करीब 100 सीटें जीती थीं। 2012 में सपा और 2007 में बसपा भी पूर्वांचल विजय के बाद ही सत्ता में आई थी।
खतरे में भागीदारी संकल्प मोर्चा!
ओम प्रकाश राजभर की अगुआई में भागीदारी संकल्प मोर्चा गठित हुआ था, जिसमें सुभासपा द्वारा 11 दलों के शामिल होने का दावा किया गया। चर्चा भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी के शामिल होने की भी थी, लेकिन सपा से गठबंधन का एलान होते ही इन दलों ने मोर्चे से किनारा कर लिया। एआइएमआइएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने कहा, अखिलेश यादव के साथ ओम प्रकाश राजभर गए हैं, हम नहीं। वहीं, आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर ने कहा कि वह कभी भी मोर्चा का हिस्सा नहीं रहे। पार्टी के महासचिव व ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर ने कहा कि चंद्रशेखर मोर्चा की बैठकों में शामिल जरूर रहे, लेकिन औपचारिक रूप से कभी मोर्चे में शामिल नहीं रहे।
मोर्चे में शामिल रहे तीन दलों ने बनाई दूरी
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनीव अर्कवंशी ने बताया कि स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी को मिलाकर नौ दल शामिल हुए थे। एआइएमआइएम (ओवैसी), अपना दल (कृष्णा पटेल) और जन अधिकारी पार्टी (बाबू सिंह कुशवाहा) सहित तीन दलों ने आयोजन से दूरी बनाये रखी।
Updated on:
27 Oct 2021 05:50 pm
Published on:
27 Oct 2021 05:28 pm
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