
Shivpal OP Rajbhar VIP Chief Mukesh Sahni Election Symbols
लखनऊ. देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मात्र दो महीने का वक्त बचा है। अगले साल पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में सबसे रोचक व दिलचस्प मुकाबला उत्तर प्रदेश में है। यहां सत्ताधारी बीजेपी की विपक्षी दलों से सीधी टक्कर होती दिख रही है। गठबंधन कर साथ आने वाली चाचा-भतीजे की जोड़ी चुनावी समर के लिए तैयार है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के सिंबल 'चाबी' पर शिवपाल चुनाव नहीं लड़ पाएगी। प्रसपा का चुनाव चिन्ह हरियाणा की जननायक पार्टी को आवंटित कर दिया है। शिवपाल चुनाव चिन्ह साइकिल पर चुनाव लड़ेंगे। इसी तरह भाजपा के सहयोगी दल निषाद पार्टी भी 'नाव' के साथ मैदान में नहीं उतर सकेगी। उत्तर प्रदेश के पांच राज्यों के लिए विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को नाव चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। वीआईपी पार्टी पहली बार यूपी चुनाव में उतरी है।
यूपी की राजनीति में महत्वपूर्ण है निषाद
यूपी में संजय निषाद की पार्टी का भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन है। वहीं बिहार में मुकेश सहनी की वीआईपी एनडीए का हिस्सा है। दोनों पार्टियों का मेन वोटर निषाद ही है। निषाद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की एक प्रमुख जाति है जिनमें नाविक और मछुआरे आते हैं। इनमें मांझी, बिंद सहित 17 से अधिक उपजातियां हैं। वहीं यूपी की जनसंख्या में करीब 18 प्रतिशत निषाद है। खासकर पूर्वांचल के क्षेत्र में निषाद समुदाय महत्वपूर्ण है। यूपी की करीब 60 विधानसभा सीटों पर इनकी अच्छी आबादी है।
ओम प्रकाश राजभर को भी झटका
विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने ओम प्रकाश राजभर को भी झटका दिया है। ओपी राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी 'छड़ी' लेकर चुनावी मैदान में नहीं उतर पाएगी। हालांकि, राजभर ने इसके लिए अपील दर्ज कराई है। फिलहाल वह किस सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे, इस पर संशय बरकरार है। बता दें कि सुहेलदेव भासपा का गठबंधन समाजवादी पार्टी के साथ है। इससे पहले 2017 में ओपी राजभर बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़े थे और चार सीटों पर उनके विधायक बने थे।
Published on:
27 Dec 2021 11:19 am
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