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UP Assembly Election 2022 : पहले चरण को भेदने के लिए सपा—रालोद ने बनाया ये फार्मूला, घोषणा पत्र में किसान को प्रमुखता

UP Assembly Election 2022 चुनाव अभियान के पहले दौर का मतदान आगामी 10 फरवरी को होगा। इसमें वेस्ट यूपी के 11 जिलों की 58 सीटों पर दिग्गजों की साख लगी हुई है। पहला दौर भाजपा,सपा रालोद गठबंधन के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है। गठबंधन ने वेस्ट फतह के लिए जो फार्मूला तैयार किया है। उसमें किसान को प्रमुख रूप से रखा गया है।

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मेरठ

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Kamta Tripathi

Jan 18, 2022

UP Assembly Election 2022 : वेस्ट फतह के लिए गठबंधन का ये फार्मूला तैयार, घोषणा पत्र में किसान को प्रमुखता

UP Assembly Election 2022 : वेस्ट फतह के लिए गठबंधन का ये फार्मूला तैयार, घोषणा पत्र में किसान को प्रमुखता

UP Assembly Election 2022 विधानसभा चुनाव सपा रालोद गठबंधन इस बार किसी भी कीमत पर वेस्ट यूपी की सीटों को जीतना चाहता है। इसके लिए गठबंधन ने पूरी ताकत झोंक दी है। एक ओर जहां प्रत्याशी चयन में काफी सावधानी बरती है। वहीं दूसरी ओर अब एक—एक किसान की वोट गठबंधन के पक्ष में करने को किसानों के मुद्देन निरंतर गरमा रहा है। दोनों दलों के संयुक्त घोषणा पत्र और पार्टियों के अपने—अपने घोषणा पत्रों में भी किसानों से जु़ड़े कई अहम प्रस्ताव रखे गए हैं। किसान आंदोलन के समय से ही रालोद और समाजवादी पार्टी भाजपा और उसकी सरकार पर हमलावर है। लखीमपुर खीरी प्रकरण हो या फिर हाथरस मामला दोनों में ही रालोद और सपा ने सड़क पर उतरकर जमकर प्रदर्शन किया। इस मुद्दे पर सदन में भी जमकर हंगामा हुआ। किसान कानून वापस होने के बाद सपा ने इसका श्रेय किसान आंदोलन को दिया और भाजपा सरकार को नाकामी बताया। रालोद और सपा दोनों की ओर से गेहूं, धान खरीद, खाद की कमी और महंगाई को भी किसानों से जोड़कर मुद्दा बनाया गया। पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि के बाद गांव-गांव सर्वे के जरिए पार्टी किसानों के नजदीक पहुचने का प्रयास की। इस बीच दम तोड़ने वाले किसानों के घर प्रतिनिधि मंडल भेजा गया।


अखिलेश का अन्न संकल्प अभियान का हिस्सा
अब गठबंधन की रणनीति है कि जिस तरह से भाजपा ने पश्चिम बंगाल के चुनाव में किसान परिवारों से भिक्षा के रूप में एक-एक मुट्ठी चावल लिया, उसी तर्ज पर अन्न संकल्प अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत पार्टी के कार्यकर्ता गांव- गांव जाकर किसानों के हितों की दुहाई देकर एक-एक मुट्ठी गेहूं या चावल हाथ में लेकर संकल्प दिलाएंगे। इस संकल्प के जरिए पार्टी की पहुंच हर घर तक बनाने की रणनीति है। इससे जहां एक तरफ भाजपा को किसान विरोधी साबित करने का प्रयास किया जाएगा तो दूसरी तरफ खुद को किसान हितैषी साबित करने का प्रयास होगा। इसकी शुरूआत पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कर दी है। जब उन्होंने हाथ में अन्न लेकर भाजपा सरकार केा उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया।

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घोषणा पत्र में दिखेगा किसान
सूत्रों की माने तो घोषणा पत्र बनाने से पहले कई कृषि विशेषज्ञों से यह राय ली र्गइ है कि किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं। सपा शासन में मंडियों के विस्तार की योजना को वाहवाही मिली है। घोषणा पत्र में अधूरी मंडियों को नए सिरे से पूरा कराने, संबंधित क्षेत्र में तैयार होने वाली उपज के लिए विपणन केंद्र बनाने, कृषि उत्पाद के निर्यात की रणनीति, आलू को जरूरतमंद राज्यों में भेजवाने की नीति तैयार करने, गन्ना किसानों को राहत जैसे मुद्दे शामिल किए जा सकते हैं। फसल बीमा योजना में बीमा कंपनी और बैंक किस तरह से किसानों को ज्यादा से ज्यादा फायदा पहुंचाए।