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UP Assembly Elections 2022 : स्वामी प्रसाद मौर्य को क्यों मनाने में जुटे हैं सुनील बंसल और स्वतंत्र देव सिंह

UP Assembly Elections 2022 : प्रतापगढ़ के मूल निवासी स्वामी प्रसाद मौर्य ने रायबरेली के डलमऊ के बाद कुशीनगर के पडरौना को अपना कार्यक्षेत्र बनाया है। राष्ट्रीय लोकदल से राजनीति का सफर शुरू करने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य जनता दल में रहे और फिर सबसे लंबा समय बहुजन समाज पार्टी में गुजारा। बसपा प्रमुख मायावती के बेहद खास माने जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य 2017 ने विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने।

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लखनऊ

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Amit Tiwari

Jan 11, 2022

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लखनऊ. UP Assembly Elections 2022 : यूपी की अन्य पिछड़ी जातियों में अहम स्थान रखने वाले मौर्य, कुशवाहा, शाक्य जाति के प्रमुख नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा छोड़ने से पार्टी नेतृत्व को गहरा झटका लगा है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी के संगठन मंत्री सुनील बंसल और यूपी बीजेपी अध्यक्ष को इन्हें मनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सुनील बंसल न केवल स्वामी प्रसाद मौर्य, बल्कि भाजपा के अन्य नाराज विधायकों को भी मनाने का काम करेंगे। स्वामी प्रसाद के पार्टी छोड़ने से भाजपा गहरे सदमे में है। शायद यही वजह है योगी सरकार के नंबर टू और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए न केवल दुख जताया, बल्कि स्वामी प्रसाद मौर्य से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने को कहा है।

नंद गोपाल नंदी ने बताया आत्मघाती कदम

योगी सरकार के एक और कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी ने अफसोस जताते हुए कहा कि यह आत्मघाती निर्णय होगा। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने स्वामी प्रसाद मौर्य ने गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी की थी।

गौरव भाटिया को बदलना पड़ा अपना ट्वीट

शीर्ष नेतृत्व के दवाब के बाद गौरव भाटिया अपने ट्वीट को बदलना पड़ा। ये सभी निर्णय पार्टी में स्वामी प्रसाद मौर्य की अहमियत को जताने के लिए काफी है।

ओबीसी जाति में स्वामी प्रसाद मौर्य की अच्छी पकड़

उत्तर प्रदेश में 4.6 फीसद कुशवाहा, कोइरी और शाक्य व मौर्य जैसी उपजातियां है। स्वामी प्रसाद मौर्य लंबे समय से इन जातियों के नेता रहे हैं और यही वजह रही है कि बसपा सरकार में स्वामी प्रसाद मौर्य की अहम भूमिका रहती थी।

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अमित शाह ने भाजपा में कराया था शामिल

मायावती से मतभेद के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने बड़े सम्मान के साथ स्वामी प्रसाद मौर्य को न केवल पार्टी में शामिल कराया था, बल्कि उनकी बेटी संघमित्रा मौर्या को बदायूं से भाजपा का सांसद बनाया था। स्वामी प्रसाद के पुत्र उत्कर्ष मौर्य को भी ऊंचाहार से भाजपा से टिकट मिला था, लेकिन वे चुनाव हार गये थे। भारतीय जनता पार्टी नहीं चाहती है कि ओबीसी की तीसरी सबसे बड़ी जाति, मौर्य, शाक्य, सैनी, कुशवाहा जाति भाजपा से नाराज हो इसलिये वो स्वामी प्रसाद मौर्य को मनाने में जुटी है।