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शिवकाशी (तमिलनाडु) से राजेन्द्र गहरवार
दुनिया की दूसरे नंबर की पटाखानगरी शिवकाशी में इस बार चुनावी नजारा बदला हुआ है। पहले प्रदूषण और फिर कोरोना की मार ने आतिशबाजी उद्योग में तालाबंदी की नौबत पैदा कर दी है। सड़क पर चुनावी नारों का शोर तो है पर औद्योगिक क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है। हमेशा की तरह यहां मुकाबला पटाखा किंग परिवारों के बीच ही है। दल कोई भी हो हर किसी का वादा पटाखा उद्योग को संरक्षण देने का ही है। लेकिन देखना यह है कि पटाखा और प्रिंटिंग उद्यमियों की निराशा किसके लिए भारी पड़ती है। इस पर स्थानीय निवासी पी नरेशन कहते हैं कि २०१९ के लोकसभा चुनाव से पहले स्थानीय नागरिकों ने चार माह तक आंदोलन चलाकर शिवकाशी बंद कराया था। इस विरोध प्रदर्शन के बीच हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के मणिकम टैगोर भारी मतों से जीते थे। इस बार वैसा गुस्सा तो नहीं है पर निराशा जरूर है। शिवकाशी विरुधुनगर जिले की सीट है और इसका असर इस जिले की सभी सात विधानसभा सीटों पर पड़ता है।
दक्षिण भारत की काशी कही जाने वाली शिवकाशी के विकास का पर्याय यहां का पटाखा उद्योग है। जो शिवकाशी से फैलकर अब विरुधुनगर और मदुरै तक पहुंच चुका है। चीन को पछाड़कर देश और दुनिया में आतिशबाजी में धाक बनाने वाले यहां के उद्योग ने पूरे रीजन का कायापलट कर दिया है। इंजीनियरिंग से लेकर तमाम बड़े शैक्षणिक संस्थान इसी की देन हैं। इसलिए यहां के लिए मुद्दा केवल यही है। जब उस पर संकट हो तो चर्चा भी केवल उसी की होनी है। जैसा इस चुनाव में सुनाई पड़ रहा है। एआइएडीएमके से शिवकाशी से दो बार विधायक रहे केटी राजेंथ्रभालाजी को पार्टी ने पड़ोस की सीट राजापलयम से उतारा है। उनके स्थान पर शिवकाशी से एआइएडीएमके ने लक्ष्मी गणेशन को प्रत्याशी बनाया है। वहीं डीएमके से समझौते में मिली इस सीट से कांग्रेस ने जी अशोकन को उतारा है। 2016 के चुनाव में कांग्रेस शिवकाशी में दूसरे स्थान पर रही थी इसीलिए बंटवारे में उसी के खाते में सीट आई। भाजपा पिछले चुनाव में यहां पर चौथे स्थान पर थी, इस बार एआइएडीएमके के साथ गठबंधन में होने के कारण उसके समर्थन में हैं। यह भी दिलचस्प है कि एआइएडीएमके की गणेशन और कांग्रेस के अशोकन आपस में रिश्तेदार हैं और दोनों ही परिवारों का आतिशबाजी उद्योग में दबदबा है। इसलिए दोनों ही इस उद्योग के संरक्षण का मुद्दा उठा रहे हैं। प्रचार में फिल्म अभिनेता कमल हासन की पार्टी एमएनएम के प्रत्याशी एस मुगुंथन भी पूरी ताकत झोंके हुए हैं। शिवकाशी सीट से 26 उम्मीदवार मैदान में हैं।
देश की एक दिन की दीवाली, यहां सालभर का जलसा-
एक अनुमान के मुताबिक देश में खपत होने वाली आतिशबाजी में से 90 प्रतिशत का उत्पादन शिवकाशी में ही होता है। यह कारोबार सैकड़ों करोड़ का है। तभी तो पटाखा उद्योग से जुड़े पी सेंथल कहते हैं देश की एक दिन की दीवाली पर चार चांद लगाने के लिए यहां 364 दिन काम होता है। तब पटाखे लोगों तक पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि इस उद्योग से करीब आठ लाख लोग सीधे जुड़े हुए हैं। इनमें उत्तर भारत से आने वाले श्रमिक कारीगर भी शामिल हैं। इससे साफ है कि यहां के लिए यह सालभर के जलसे जैसा है। वे स्वीकार करते हैं कि प्रदूषण को लेकर उठे सवाल और कोरोना की वजह से दिक्कत पैदा हुई है। अधिकतर श्रमिक जा चुके हैं, छोटी फैक्ट्रियां बंद हैं और बड़े उद्योगों में नाम मात्र का उत्पादन हो रहा है।
प्रशासनिक सख्ती से नाराजगी-
दरअसल पटाखों के निर्माण में सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है, फरवरी 2021 में हुए विस्फोट में ६ लोगों की मौत हो गई थी। इसके लाइसेंस की शर्तों और सुप्रीम कोर्ट की ग्रीन पटाखों की गाइडलाइन ने परंपरागत तरीके से पटाखों का निर्माण अटक गया है। यहां पर एक हजार से अधिक फैक्ट्रियां हैं पर लाइसेंस का आवेदन दो सौ लोगों ने ही किया है। इस पर पटाखा निर्माण से जुड़े अन्नन कहते हैं कि इतने संसाधन छोटे व्यापारी नहीं जुटा सकते और फिर महंगा होने से कारोबार नहीं होगा। लाइसेंस नहीं होने से प्रशासन सख्ती कर फैक्ट्रियां बंद करा रहा है, इसको लेकर नाराजगी है। यह चुनाव में कितना असर डालेगा इस पर अन्नन कहते हैं कि कुछ कहा नहीं जा सकता। लोकसभा चुनाव में तो इसका असर हुआ था और कांग्रेस सांसद की जीत की एक वजह यह भी थी।
प्रिटिंग उद्योग पर भी संकट:
शिवकाशी की पहचान प्रिटिंग उद्योग के चलते भी है। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने तो इसे मिनी जापान की संज्ञा दी थी। पुराने प्रिंटरों में से एक मुरगन कंपनी के पदाधिकारी बताते हैं कि थ्रीडी प्रिंटिंग सहित अत्याधुनिक तरीका अपनाए जाने से यहां का प्रिंटिंग कारोबार पिछड़ रहा है।
Published on:
02 Apr 2021 11:45 am
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