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UP Assembly Elections 2022: …तो नदी पार कर इस गांव की आधी आबादी करेगी मतदान

UP Assembly Elections 2022: वैसे तो पिछले पांच साल में समूचे यूपी में विकास कार्य हुए। सड़कों का जाल बिछ गया। शहरों में मेट्रो से लेकर फ्लाईओवर व आरओबी तक बन गए। लेकिन पूर्वांचल के सोनभद्र जिले में एक ऐसा गांव है जहां की आधी आबादी के समक्ष मतदान को लेकर गंभीर संकट है। ये गांव है पिंडारी (Pindari Village) जहां के लोगों को मतदान केंद्र तक जाने के लिए नदी पार करना होगा।

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पिंडारी गांव के बीच से बहती बिच्छी नदी

पिंडारी गांव के बीच से बहती बिच्छी नदी

वाराणसी. UP Assembly Elections 2022: यूं तो पिछले पांच सालों में विकास कार्य बहुत हुए। सड़कों का जाल बिछ गया। गांवों में संपर्क मार्ग बन गए। शहरों में मेट्रो रेल दौड़ने लगी। फ्लाईओवर से लेकर आरओबी तक का जाल बिछ गया। लेकिन पूर्वांचल के सोनभद्र के पिंडारी गांव (Pindari Village) में रहने वाले आदिवासी इस बार अपना मतदान कैसे करेंगे, ये यक्ष प्रश्न है। वजह इस गांव के बीच से ही बिच्छी नदी बहती है और उसे पार करना ग्रामीणो के लिए दुरूह कार्य है। कारण कि इस नदी पर एक पुल बना था जो दो साल पहले ही टूट गया। ऐसे में ये गांव ही दो भाग में बंट गया है। ग्रामीणों का ये हाल है कि उन्हें अपने लोगो से मिलने के लिए नदी पार करनी होती है।

पांच साल पहले टूटा पिंडारी गांव के बिच्छी नदी पर बना पुल का पावा

बता दें कि पिंडारी ग्राम सभा की जनसंख्या करीब 10,000 है। कुल आबादी का आधा हिस्सा नदी के इस पार और आधा नदी के दूसरी ओर यानी उस पार रहती है। ऐसे में गांव के लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए भी बड़ी मुसीबत झेल रहे हैं। ग्रामीणो के अनुसार 2013-14 में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत छह किलोमीटर लंबी सड़क और पिंडारी गांव के मध्य पड़ने वाली बिच्छी नदी पर एक पुल बनवा दिया था। इस पुल के बनने के बाद लोगों को काफी आसानी हुई। लेकिन 2016 में बरसात में नदी में पानी का बहाव तेज होने पर पुल का एक पावा गिर पड़ा। पुल का पावा गिरने के बाद गांव वाले फिर से परेशानी में पड़ गए। पुल के पावे को ठीक करने के लिए उन्होने कई बार शासन प्रशासन से गुहार लगाई पर हुआ कुछ भी नहीं। पुल की मरम्मत तो दूर कोई मौके पर आया तक नहीं। इसके दो साल बाद यानी 2018 की बारिश में पुल का दूसरा पावा भी गिर पड़ा।

नंगे बदन नदी पार कर स्कूल जाते हैंं पिंडारी गांव के बच्चे

इसके बाद भी किसी ने पिंडारी गांव की सुधि किसी ने नहीं ली। नतीजा ग्रामसभा मनरहवा, नगराज,कहमा ढांड,सतपेड़वा समेत कई टोलों के ग्रामीण पिंडारी तक पहुंचने के लिए नदी पार कर जोखिम भरा सफर करने को मजबूर हुए। इतना ही नहीं गांव के बच्चों को स्कूल जाने के लिए नदी पार करना मजबूरी बन गई। ऐसे में वो बच्चे स्कूल ड्रेस को अपने बैग में रख कर नंगे बदन नदी को तैर कर पार करते है। फिर नदी पार कर स्कूल ड्रेस पहनते हैं। इससे हर वक्त बड़े हादसे का खतरा भी बना रहता है।

बरसात के दिनों में पिंडारी के बच्चे नहीं जाते स्कूल

पिछली बरसात में ग्रामीण बच्चों के स्कूल जाने के लिए नदी पर एक लकड़ी का पुल तैयार किया गया लेकिन वो भी ज्यादा नही चल सका। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि नदी का पुल टूटने से हम लोगों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। बच्चों को स्कूल भेजते हुए भी डर लगता है कि नदी पार करते हुए कोई अनहोनी ना हो जाए। बरसात के मौसम में जब नदी का जलस्तर बढ़ जाता है तो बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है।

पुल बनवाने को शासन प्रशासन से कई बार कहा गया पर नहीं हुई सुनवाई

पूर्व ग्राम प्रधान धीरेंद्र कुमार जायसवाल बताते है कि बिच्छी नदी पर बना पुल ग्रामीणों की लाइफ लाइन का काम कर रहा था। पुल के टूटने से ग्रामीणों के समक्ष मुसीबत खड़ी हो गई। मैने कई बार शासन को पत्र भी लिखा, प्रशासन से भी गुहार लगाई लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।

पिंडारी के ग्रामीणों की बड़ी समस्या कैसे जाएं पोलिंग बूथ तक

ग्राम प्रधान राम संजीवन भारती बताते हैं कि हमारे गांव में सब कुछ ठीक है बस पुल बन जाए तो सब ठीक हो जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव सिर पर है। ऐसे में हम सब मतदान कैसे करेंगे ये बड़ा सवाल है। वो कहते हैं कि नदी पार करने के अलावा दूसरा रास्ता अख्तियार करते हैं तो लगभग 40 किलोमीटर का सफर तय कर पोलिंग बूथ तक पहुंच पाएंगे। ऐसे में बहुतेरे लोग तो मतदान के लिए जाते ही नही जिससे मतदान प्रतिशत गिरता है।