
सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर
वाराणसी. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने भाजपा को उसी के गढ़ में चुनौती देने की तैयारी में हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शशि प्रताप सिंह ने पत्रिका संग बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वाराणसी, ओम प्रकाश राजभर का घर है। ऐसे में पार्टी के कार्यकर्ता भी यही चाहते हैं कि वो बनारस से ही चुनाव लड़ें। उन्होंने कहा कि वैसे भी अगर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे तो बड़ा संदेश जाएगा और यहां के कार्यकर्ता भी उत्साहित होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि ओमप्रकाश राजभर अपने कार्यकर्ताओं की इच्छा का सम्मान करेंगे और वाराणसी के शिवपुर से ही चुनाव लड़ेंगे।
प्रदेश अध्यक्ष शशि प्रताप का कहना है कि इस बात की ज्यादा संभावना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ओपी राजभर वाराणसी के शिवपुर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतरें। वैसे भी पिछली बार भी शिवपुर विधानसभा से भले ही भाजपा के टिकट पर उनके प्रत्याशी अनिल राजभर ने जीत हासिल की पर उसमें भी हम लोगों का ही ज्यादा योगदान रहा। हमारे सहयोग से अनिल जीत तो गए पर पांच साल में क्षेत्र में कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। ऐसे में पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता ये चाहते हैं कि इस बार खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद बनारस के शिवपुर विधानसभा से चुनाव लड़ें।
प्रदेश अध्यक्ष शशि प्रताप का कहना रहा कि समाजवादी पार्टी से गठबंधन के तहत वाराणसी में सुभासपा को 2 सीट मिल सकती है। इसमें से एक अजगरा विधानसभा क्षेत्र है जिस पर पार्टी के कैलाश नाथ सोनकर विधायक हैं। दूसरा शिवपुर विधानसभा क्षेत्र है। ऐसे में अबकी बार ये दोनों सीट सुभासपा के खाते में आनी तकरीबन तय है।
उन्होंने कहा कि वैसे भी जनता भाजपा के झूठ और महंगाई से जनता त्रस्त है। यही वजह है कि समाज के सभी वर्ग का समर्थन सुभासपा और सपा अध्यक्ष को मिल रहा है। बताया कि सुभासपा और सपा गठबंधन के प्रत्याशियों की घोषणा इसी सप्ताह हो जाएगी।
बता दें कि ओमप्रकाश राजभर मूलतः बलिया जिले के रसड़ा विकास खंड के रामपुर गांव के निवासी हैं। हालांकि बनारस में भी उनका घर है। 2017 के विधानसभा चुनाव में वो गाजीपुर जिले की जहूराबाद विधानसभा सीट से जीते फिर योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने। हालांकि उन्होंने अपने तेवर में कभी कमी नहीं आने दी। अपने लोगो के लिए वो सदैव लड़ते रहे। फिर मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। गठबंधन से अलग हो गए। इसी का नतीजा रहा कि पूर्वांचल में सुभासपा अध्यक्ष की सक्रियता लगातार बनी रही।
Published on:
24 Jan 2022 12:03 pm
बड़ी खबरें
View Allचुनाव
ट्रेंडिंग
