
लखनऊ. UP Assembly Elections 2022: उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में यूपी की सत्ता पाने के लिए सियासी दल अपनी पूरी ताकत के साथ चुनावी समर में उतर चुके हैं। राजनीतिक दल आरक्षित सीटों को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतना चाहतें हैं, क्योंकि अगर पिछले तीन विधानसभा के चुनावों के नतीजें देखें तो जिस दल ने सबसे ज्यादा आरक्षित सीटों पर जीत हासिल की है, उसी दल ने उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई है। यूपी में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए 86 विधानसभा की सीटें रिजर्व हैं। इनमें से 84 सीटें अनुसूचित जाति और दो सीटें जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों पर जीत का परचम फहराने के लिए भारतीय जनता पार्टी, समादवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस आदि सियासी दल दलित वर्ग के मतदाताओं को रिझाने में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे हैं।
65 फीसदी से अधिक सीट जीतने वाले दल को मिली है सत्ता
उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए 86 विधानसभा की सीटें आरक्षित हैं। इनमें से 84 सीटें अनुसूचित जाति और दो सीटें जनजाति के लिए आरक्षित हैं। भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी सहित अन्य दल इन आरक्षित सीटों के लिए अपनी अलग-अलग रणनीति को लेकर सियासी मैदान में उतरे हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की सत्ता पाने के लिए इन 86 सीटें बहुत ही अह्म हैं। इन आरक्षित सीटों पर जो भी दल ने 65 फीसदी से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर लेता है, वहीं राजनीतिक दल ही यूपी की सत्ता में काबिज में होता है और इस बात का प्रमाण उत्तर प्रदेश में हुए पिछले 3 विधानसभा के नतीजों से देखने को मिलता है।
2007 में बसपा ने 69 फीसदी सीटों पर दर्ज की थी जीत
साल 2007 में हुए विधानसभा के चुनाव में अनुसूचित जाति के लिए 89 सीटें आरक्षित थीं। इस चुनाव में बसपा ने 61 रिजर्व सीटों पर जीत दर्ज की थी। सपा ने 13, बीजेपी ने 7, कांग्रेस ने 5, आरएलडी ने 1, राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी ने 1 और निर्दलीय ने 1 सीट पर जीत दर्ज की थी। बसपा ने 69 फीसदी रिजर्व सीटों पर जीत दर्जकर उत्तर प्रदेश की सत्ता पर कब्जा किया था और बसपा ने पूरे 5 साल यूपी में राज किया था।
2012 में 68% सीटें जीतकर सपा ने यूपी में बनाई थी सरकार
इसके बाद साल 2012 के विधानसभा चुनाव में 85 सीटें अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित थी। इस चुनाव में सपा ने इनमें से 58, बसपा ने 15, कांग्रेस ने 4, बीजेपी ने 3, आरएलडी ने 3 और निर्दलियों ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की थी। सपा ने इस चुनाव में आरक्षित वर्ग की 68 फीसदी सीटों पर जीत दर्ज कर प्रदेश में अपने दम पर बहुमत लाकर पहली बार सरकार बनाई थी।
भाजपा ने 2017 में जीती थी 88 फीसदी सीटें
2017 के विधानसभा चुनाव में यूपी में आरक्षित सीटों की संख्या 86 हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूपी में पहली बार दो सीटें एसटी के लिए आरक्षित की गई थी। ये दोनों सीटें सोनभद्र जिले में हैं। बीजेपी ने इनमें से 70 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उसने एससी वर्ग की 69 और एसटी वर्ग की 1 सीट जीती थी। वहीं सपा ने 7, बसपा ने 2 और 1 सीट निर्दलीय ने जीती थी. अपना दल ने 3 सीटें जीती थी। इनमें से 2 एससी और 1 एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सीट थी। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने 88 फीसदी सीटों पर जीत दर्जकर उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनायी।
बहुजन समाज पार्टी
इस बार भी 2022 के विधानसभा चुनाव में सभी राजनीतिक दलों की नजर इन एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर है। हाल ही में बसपा अध्यक्ष मायावती ने यूपी की 86 आरक्षितों सीटों की समीक्षा की थी। और इन सीटों पर ब्राह्मण-दलित फार्मूला अपनाने पर जोर दिया था। मायावती ने इसकी जिम्मेदारी पार्टी के महासचिव और सतीश चंद्र मिश्रा को सौंपी है।
भारतीय जनता पार्टी
भाजपा ने भी आरक्षित सीटों पर 2017 के नतीजों को दोहराने के लिए प्लान तैयार कर रखा है। रणनीति के तहत यूपी बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कार्यकर्ताओं को अपने-अपने गांव में दलितों के घर जाने और उनके साथ चाय पीने के लिए निर्देश दे रखें हैं। यूपी बीजेपी अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे दलितों को समझाएं कि मतदान जातिवाद, क्षेत्रवाद और पैसे के नाम पर न करें, बल्कि राष्ट्रवाद के नाम पर करें। केंद्र और यूपी की भाजपा सरकार ने भी दलितों से जुड़ी कई योजनाओं को एलान कर रखा है।
कांग्रेस
उत्तर प्रदेश में अपनी खोयी जमीन तलाशने में जुटी कांग्रेस भी 2022 के विधानसभा में पूरी ताकत लगाये हुए है। दलितों को अपने पाले में करने के लिए कांग्रेस ने हर विधानसभा क्षेत्र में 100-100 दलित नेता तैयार करने की रणनीति बनाई है। कांग्रेस ने इसकी जिम्मेदारी अनुसूचित जाति विभाग के शहर और जिलाध्यक्षों को सौंपी है।
समाजवादी पार्टी
समाजवादी पार्टी भी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए दलित मतदाताओं को साधने में जुटी है। इसके अलावा सपा ने दलितों को रिझाने के लिए कुछ समय पहले बाबा साहब वाहिनी का गठन भी किया था। इसके अलावा सपा ने दलित महापुरूषों के कई कार्यक्रम आयोजित किए थे और कई घोषणाएं भी कर रखी है।
Published on:
26 Nov 2021 02:46 pm
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