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मायावती के ‘राजदार’ अफसर, आखिर क्यों छोड़ गए BSP का साथ

UP Assembly Elections 2022 'मंझधार में फंसी बसपा की नैया, सतीश मिश्र बचे अकेले खेवैया' इन लाइनों को सुनकर एक बात तो आपको साफ हो गई होगी कि मामला क्या है। लेकिन उसके पीछे की कहानी बताएगी हमारी स्पेशल रिपोर्ट...  

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लखनऊ

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Dinesh Mishra

Feb 11, 2022

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UP Assembly Elections 2022 में इस समय उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अपने पूरे शबाब पर है। तमाम पार्टियों के साथ सैकड़ों नेता चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। वहीं ऐसा पहली बार है जब बसपा सुप्रीमो मायावती अकेले पार्टी की कमान संभाले हैं। उनके साथ है सिर्फ सतीश मिश्र ही अकेले बचे हैं, जो विश्वस्त सलाहकार माने जाते हैं। कभी मायावती के आसपास अक्सर दिखने वाले उनके खास अधिकारी अब इस बार दिखाई नहीं दे रहे हैं। यह कभी बसपा चीफ मायावती के राजदार हुआ करते थे। साल दर साल उपेक्षा और आंतरिक कलह ने मायावती के सबसे करीब और खास रहने वाले अधिकारियों को उनसे दूर कर दिया। इनमें आइएएस कुंवर फतेह बहादुर, पूर्व आइपीएस (डीजीपी) बृजलाल, पदम् सिंह, राम बहादुर, त्रिभुवन राम, पूर्व आइएएस पीएल पुनिया जैसे बड़े नाम शामिल हैं। अब रणनीतिकार और राजनीतिक सलाहकार, प्लानर और संगठन के नाम पर उनके साथ सिर्फ सतीश चन्द्र मिश्रा ही बचे हैं। जिन्हें अब सबसे खास और सबसे करीबी के तौर पर देखा जा रहा है। यह पार्टी के महासचिव भी हैं।

1.पूर्व आईएएस फतेह बहादुर
साल 2007 से लेकर 2012 की मायावती सरकार में प्रमुख सचिव रहे कुँवर फतेह बहादुर ने हाल ही में सपा जॉइन कर ली है। उन्होने मायावती का साथ छोडने का मन 2017 से ही बना लिया था। जब उनकी उपेक्षा का आरोप उन्होने बसपा के कई बड़े लोगों पर लगाया था। तब से ही वो मायावती से दूर रहने लगे थे।


2.पूर्व आईपीएस बृजलाल
1977 बैच के आईपीएस रहे बृजलाल को मायावती का सबसे करीबी अधिकारी माना जाता था। जिसे किसी काम पर लगाने के बाद वो निश्चिंत हो जाती थीं। साल 2011 में मायावती ए उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस का डीजीपी बनाया। रिटायरमेंट के बाद उन्होने 2015 में भाजपा जॉइन कर ली। तब से लेकर आज तक वो भाजपा में ही हैं। वर्तमान में बृजलाल राज्यसभा सांसद हैं। दलितों के एक बड़े चेहरे के रूप में उनकी गिनती होती है।

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3.पद्म सिंह
मायावती के सुरक्षा अधिकारी रहे पदम सिंह को उनकी परछाई के तौर पर माना जाता था। पदम सिंह को डकैतों से मुठभेड़ को लेकर 2004 में राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला है। वहीं 2007 के दौरान मायावती सरकार में उनकी सैंडल साफ करके मीडिया की सुर्खियों में आ गए। लेकिन जब डीजीपी बृजलाल भाजपा में शामिल हुए तो पदम सिंह भी उन्हे छोडकर बीजेपी के हो लिए।

4.राम बहादुर
बसपा सरकार में राम बहादुर एलडीए वीसी रह चुके हैं। मायावती ने उन्हें 2014 में लोकसभा चुनाव के समय मोहनलालगंज से अपना प्रत्याशी बनाया था। लेकिन बीजेपी से हार का सामना करना पड़ा था।

5.त्रिभुवन राम
मायावती का साथ छोडकर जाने वालो में इंजीनियर भी शामिल हैं। साल 2011 में पीडबल्यूडी के चीफ़ इंजीनियर त्रिभुवन राम ने वीआरएस ले लिया था। फिर वो बसपा में शामिल होकर वाराणसी की अजहरा सीट से बसपा के विधायक चुने गए थे। मायावती ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में मछली शहर से अपना प्रत्याशी बनाया था। लेकिन वो हार गए। अब इस बार वो भाजपा में शामिल होकर वाराणसी से चुनाव लड़ रहे हैं।

6.पूर्व आइएएस पीएल पुनिया
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी पीएल पुनिया कभी मायावती के राजदारों में सबसे आगे थे। मायावती के मुख्यमंत्री रहने के दौरान वो प्रमुख सचिव बने हुए थे। लेकिन नौकरी छोडने के बाद वो सीधे कांग्रेस के टिकट पर 2009 लोकसभा चुनाव में बाराबंकी सीट से सांसद चुने गए थे। वहीं मनमोहन सिंह सरकार में वो केंद्रीय मंत्री भी रहे। फिलहाल वर्तमान में कांग्रेस में छत्तीसगढ़ के चुनाव प्रभारी हैं।